जुसार जी: राजस्थान के लोकदेवता एवं विवाह के संरक्षक

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(विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)

मूल जानकारी

  • जन्मस्थान: रमलोहा (राजस्थान)

  • मंदिर स्थल: स्यालोदा (नीम का थाना, सीकर जिला)

  • प्रमुख मेला: रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी)

मंदिर की विशेषताएँ

  1. मूर्तियाँ:

    • दूल्हा-दुल्हन की मूर्तियाँ (विवाह के प्रतीक)

    • तीन भाइयों की मूर्तियाँ (पारिवारिक एकता का संदेश)

  2. स्थापत्य:

    • राजस्थानी लोक शैली में निर्मित।

धार्मिक महत्व

  • विवाह संरक्षक:

    • नवविवाहित जोड़े मंदिर में आशीर्वाद लेने आते हैं।

    • विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने हेतु पूजा।

  • परिवार कल्याण:

    • भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक सद्भाव का प्रतीक।

मेले की विशेषताएँ

  • रामनवमी पर विशाल आयोजन:

    • विवाहित जोड़ों द्वारा विशेष पूजा।

    • लोकनृत्य (घूमर, गीर) और लोकगीतों का आयोजन।

सांस्कृतिक प्रभाव

  • लोककथाएँ:

    • जुसार जी को पारिवारिक एकता का देवता माना जाता है।

  • परंपरा:

    • मंदिर में सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी) चढ़ाने का रिवाज़।

तुलनात्मक विश्लेषण

देवता मंदिर स्थल विशेष योगदान
जुसार जी स्यालोदा (सीकर) विवाह एवं पारिवारिक सद्भाव
सावित्री-सत्यवान बिजारण (झुंझुनू) पतिव्रता धर्म
तेजाजी परबतसर (नागौर) सर्प/गौरक्षक

जुसार जी: प्रेम, विवाह और परिवार की अखंडता के प्रतीक!

“जुसार री छाप, विवाह री आस!”

(राजस्थानी कहावत: जुसार जी विवाह की आशा बनाए रखते हैं)।

विशेष नोट: स्यालोदा मंदिर में “गठजोड़” नामक अनुष्ठान होता है, जहाँ नवदंपति हाथ में हाथ डालकर जुसार जी से आशीर्वाद लेते हैं।

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