देवनारायण जी: गुर्जर समुदाय के आराध्य देव

(विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)

जन्म एवं परिवार

  • जन्मस्थान: मालासेरी डूंगरी (आसींद, भीलवाड़ा)

  • वंश: बगड़ावत गुर्जर

    • पिता: सवाई भोज (भिनाय के राजा से युद्ध में शहीद)

    • माता: साद (सहदेवी)

    • पत्नी: पीपलदे

ऐतिहासिक संघर्ष

  1. पिता का बलिदान:

    • सवाई भोज ने भिनाय के राजा से गायों की रक्षा हेतु युद्ध किया।

  2. प्रतिशोध:

    • देवनारायणजी ने भिनाय के राजा को पराजित कर पिता की मृत्यु का बदला लिया।

धार्मिक महत्व

  • अवतार: विष्णु का अवतार माने जाते हैं।

  • उपनाम:

    • “औषधि के देवता” (रनके मंदिर में नीम के पत्ते चढ़ाए जाते हैं)।

    • “गौरक्षक” (गायों की रक्षा हेतु पूज्य)।

  • अनूठी परंपरा:

    • मूर्ति के स्थान पर ईंट की पूजा (रनके मंदिर में)।

सांस्कृतिक विरासत

  1. फड़ बाँचना:

    • गुर्जर भोपे “जंतर” वाद्य के साथ देवनारायणजी की फड़ गाते हैं।

    • यह राजस्थान की सबसे लंबी फड़ (कथाचित्र) है।

  2. डाक टिकट:

    • भारत सरकार ने देवनारायणजी और उनकी फड़ पर स्मारक डाक टिकट जारी किया।

प्रमुख मंदिर

स्थान जिला विशेषता
मालासेरी आसींद (भीलवाड़ा) जन्मस्थान
देवमाली ब्यावर प्राचीन मंदिर
देवघाम जोधपुरिया टोंक तीर्थस्थल
देवडूंगरी चित्तौड़गढ़ राणा सांगा द्वारा निर्मित

मेले एवं उत्सव

  • भाद्रपद शुक्ल षष्ठी-सप्तमी: मुख्य वार्षिक उत्सव।

  • माघ शुक्ल सप्तमी: विशेष पूजा।

साहित्यिक योगदान

  • “बगड़ावत” (महाकाव्य):

    • महारानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत द्वारा रचित।

    • गुर्जर वीरों की गाथाएँ।

विशेष तथ्य

  • जंतर वाद्य: लकड़ी का विशेष वाद्ययंत्र जिसे भोपे गाते समय बजाते हैं।

  • गुर्जर अस्मिता: देवनारायणजी गुर्जर समुदाय की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं।

देवनारायणजी: शौर्य, न्याय और लोकआस्था के अद्भुत संगम! 

“देव धरती, देव आकास, देव नारायण री आस!”

(राजस्थानी लोकोक्ति: देवनारायणजी की कृपा सर्वव्यापी है)।

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