देवबाबा: पशु रक्षक लोकदेवता

(संक्षिप्त परिचय एवं धार्मिक महत्व)

मूल जानकारी

  • मंदिर स्थल: नंगलाजहाज (भरतपुर)

  • प्रमुख मेले:

    • भाद्रपद शुक्ल पंचमी

    • चैत्र शुक्ल पंचमी

विशेषताएँ

  1. पशु चिकित्सक:

    • पशुओं के रोग ठीक करने की चमत्कारिक शक्ति से जुड़ी मान्यता।

  2. पूजा विधि:

    • देवबाबा को प्रसन्न करने हेतु 7 ग्वालों (गोपालकों) को भोजन कराना अनिवार्य।

  3. लोक विश्वास:

    • पशुधन की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हेतु पूजे जाते हैं।

सांस्कृतिक प्रभाव

  • मेले का महत्व:

    • पशुपालक समुदाय (विशेषकर यादव/अहीर) बड़ी संख्या में आते हैं।

    • पशुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना।

  • स्थानीय परंपरा:

    • मंदिर परिसर में पशुओं का औषधीय उपचार किया जाता है।

तुलनात्मक विश्लेषण

देवता समुदाय विशेष योगदान
देवबाबा पशुपालक पशु चिकित्सा
तेजाजी जाट सर्प/गौरक्षा
गोगाजी चौहान सर्परक्षक

देवबाबा: पशुधन के संरक्षक एवं किसानों के मसीहा!

 “देव री दवाई, पशु राखे सहाई!”

(राजस्थानी कहावत: देवबाबा की औषधि पशुओं की रक्षा करती है)।

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