देवबाबा: पशु रक्षक लोकदेवताBy rajasthanfactss / August 18, 2025 (संक्षिप्त परिचय एवं धार्मिक महत्व) मूल जानकारी मंदिर स्थल: नंगलाजहाज (भरतपुर) प्रमुख मेले: भाद्रपद शुक्ल पंचमी चैत्र शुक्ल पंचमी विशेषताएँ पशु चिकित्सक: पशुओं के रोग ठीक करने की चमत्कारिक शक्ति से जुड़ी मान्यता। पूजा विधि: देवबाबा को प्रसन्न करने हेतु 7 ग्वालों (गोपालकों) को भोजन कराना अनिवार्य। लोक विश्वास: पशुधन की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हेतु पूजे जाते हैं। सांस्कृतिक प्रभाव मेले का महत्व: पशुपालक समुदाय (विशेषकर यादव/अहीर) बड़ी संख्या में आते हैं। पशुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना। स्थानीय परंपरा: मंदिर परिसर में पशुओं का औषधीय उपचार किया जाता है। तुलनात्मक विश्लेषण देवता समुदाय विशेष योगदान देवबाबा पशुपालक पशु चिकित्सा तेजाजी जाट सर्प/गौरक्षा गोगाजी चौहान सर्परक्षक देवबाबा: पशुधन के संरक्षक एवं किसानों के मसीहा! “देव री दवाई, पशु राखे सहाई!”(राजस्थानी कहावत: देवबाबा की औषधि पशुओं की रक्षा करती है)।