1. परिचय
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending – PSL) भारतीय वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस नीति के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों को देश के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को ऋण देने के लिए निर्देशित किया जाता है, जिन्हें राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, परंतु जिन्हें पर्याप्त औपचारिक ऋण नहीं मिल पाता।
वर्तमान में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, घरेलू वाणिज्यिक बैंकों को अपने कुल ऋण का 40% और विदेशी बैंकों को अपने कुल ऋण का 40% (भारतीय परिसंपत्तियों के आधार पर) प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में देना आवश्यक है।
2. PSL लक्ष्य: कुल ANBC का 40%
ANBC (Adjustable Net Bank Credit) बैंकों की कुल मांग और समय जमा राशि से कुछ निर्दिष्ट मदों को घटाकर प्राप्त की गई राशि है। यह PSL गणना का आधार है।
40% के लक्ष्य की व्याख्या:
भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) के लिए: ANBC या क्रेडिट समतुल्य का 40%
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए: ANBC का 75%
लघु वित्त बैंकों (SFBs) के लिए: ANBC का 75%
विदेशी बैंकों के लिए: भारतीय परिसंपत्तियों के आधार पर ANBC का 40%
3. प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों का विस्तृत विवरण
A. कृषि क्षेत्र
कुल PSL का 18% अनिवार्य है, जिसमें:
किसान ऋण: फसल ऋण, ट्रैक्टर, सिंचाई सुविधाएं
कृषि-आधारित गतिविधियाँ: पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गीपालन
कृषि-संरचना: भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयाँ
सीमांत और लघु किसान: 1 लाख रुपये तक के ऋण
B. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME)
कुल PSL का 7.5% अनिवार्य है:
सूक्ष्म उद्यम: 1 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले
लघु उद्यम: 10 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले
मध्यम उद्यम: 50 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले
महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान
C. शिक्षा क्षेत्र
व्यक्तिगत शिक्षा ऋण (घरेलू और विदेशी अध्ययन)
शैक्षणिक संस्थानों को ऋण (स्कूल, कॉलेज, प्रशिक्षण केंद्र)
डिजिटल शिक्षा बुनियादी ढांचे के लिए ऋण
D. आवास क्षेत्र
व्यक्तिगत आवास ऋण (35 लाख रुपये तक शहरी क्षेत्रों में, 25 लाख रुपये तक ग्रामीण क्षेत्रों में)
किफायती आवास परियोजनाओं के लिए ऋण
ग्रामीण आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत)
E. सामाजिक अवसंरचना
स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं (अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र)
पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं
सामाजिक कल्याण परियोजनाएं
F. अन्य क्षेत्र
दिव्यांग व्यक्तियों को ऋण
महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs)
अत्यंत पिछड़े जिलों के लिए ऋण
संकटग्रस्त व्यक्तियों को पुनर्वास ऋण
4. प्रमुख समस्याएं और चुनौतियाँ
A. कार्यान्वयन संबंधी समस्याएं
लक्ष्य पूर्ति का दबाव: कई बैंक PSL लक्ष्य पूरा करने के लिए उपयुक्त आवेदकों की कमी के कारण संघर्ष करते हैं।
गुणवत्ता बनाम मात्रा: बैंक अक्सर लक्ष्य पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे ऋण मानकों में ढिलाई और एनपीए (NPA) बढ़ता है।
क्षेत्रीय असंतुलन: विकसित राज्यों में PSL लक्ष्य आसानी से पूरे हो जाते हैं, जबकि पिछड़े क्षेत्रों में कमी रहती है।
जानकारी का अभाव: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों को PSL योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
B. संरचनात्मक समस्याएं
जोखिम प्रबंधन: PSL क्षेत्रों में ऋण जोखिम अधिक होता है, क्योंकि इनमें बड़ी संख्या में छोटे और असंगठित उधारकर्ता शामिल हैं।
प्रशासनिक लागत: छोटे ऋणों के प्रबंधन की लागत अधिक होती है, जिससे बैंकों की लाभप्रदता प्रभावित होती है।
प्रलेखन समस्याएं: ग्रामीण क्षेत्रों में उधारकर्ताओं के पास आवश्यक दस्तावेजों का अभाव होता है।
मूल्यांकन मुद्दे: कृषि भूमि और ग्रामीण संपत्तियों का उचित मूल्यांकन करना चुनौतीपूर्ण है।
C. क्षेत्र-विशिष्ट समस्याएं
कृषि: मौसम संबंधी जोखिम, बाज़ार की अनिश्चितता, फसल बीमा की सीमाएं
MSME: प्रबंधन कौशल की कमी, बाज़ार पहुँच की कमी, प्रौद्योगिकी का अभाव
शिक्षा: रोज़गार की अनिश्चितता के कारण शिक्षा ऋण चुकौती में समस्याएं
सामाजिक अवसंरचना: परियोजना लागत अधिक होना और रिटर्न अवधि लंबी होना
5. सुधार के लिए सुझाव
A. नीतिगत सुधार
लचीला PSL ढांचा: विभिन्न बैंकों की क्षमताओं के अनुसार लक्ष्य निर्धारण
PSL प्रमाणपत्र बाज़ार: PSL लक्ष्य पूरा न कर पाने वाले बैंक, अधिक PSL ऋण देने वाले बैंकों से प्रमाणपत्र खरीद सकते हैं
क्षेत्र-वार लक्ष्य: प्रत्येक बैंक के लिए क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार लक्ष्य निर्धारण
प्रोत्साहन संरचना: PSL लक्ष्य पूरा करने पर कर लाभ और अन्य प्रोत्साहन
B. प्रौद्योगिकी आधारित समाधान
डिजिटल प्लेटफॉर्म: PSL आवेदन और मंजूरी के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म
ब्लॉकचेन तकनीक: पारदर्शिता और कागज़ी कार्रवाई में कमी के लिए
बिग डेटा एनालिटिक्स: उधारकर्ता के क्रेडिट मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक डेटा स्रोतों का उपयोग
मोबाइल बैंकिंग: ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बढ़ाने के लिए
C. संस्थागत सुधार
PSL कोष: सभी बैंकों के योगदान से एक समर्पित कोष बनाना
विशेषज्ञता विकास: बैंक कर्मचारियों के लिए PSL क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण
सहयोगी ऋणदाता: MFIs, NBFCs के साथ साझेदारी बढ़ाना
गारंटी योजनाएं: MSME और कृषि ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाओं का विस्तार
D. जोखिम प्रबंधन
सामूहिक ऋण: स्वयं सहायता समूहों और संयुक्त दायित्व समूहों के माध्यम से ऋण
फिनटेक एकीकरण: ऋण निगरानी और प्रबंधन के लिए फिनटेक समाधान
बीमा लिंकेज: सभी PSL ऋणों के लिए बीमा को अनिवार्य बनाना
पुनर्गठन प्रावधान: संकटग्रस्त उधारकर्ताओं के लिए लचीले पुनर्भुगतान विकल्प
E. निगरानी और मूल्यांकन
रियल-टाइम मॉनिटरिंग: PSL ऋणों की निगरानी के लिए डैशबोर्ड
सामाजिक प्रभाव माप: केवल ऋण राशि के बजाय सामाजिक प्रभाव को मापने के मानक
तीसरे पक्ष का मूल्यांकन: स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा PSL कार्यान्वयन का मूल्यांकन
ग्राहक प्रतिक्रिया तंत्र: लाभार्थियों से सीधे प्रतिक्रिया प्राप्त करने की व्यवस्था
6. भविष्य की दिशाएं
हरित PSL: नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए अलग लक्ष्य
स्टार्टअप्स और नवोन्मेष: तकनीकी नवाचारों के लिए विशेष PSL श्रेणी
डिजिटल अवसंरचना: डिजिटल इंडिया पहल को समर्थन देने वाली परियोजनाएं
स्वास्थ्य अवसंरचना: महामारी के बाद के युग में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
कौशल विकास: व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए ऋण
7. निष्कर्ष
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण भारत की वित्तीय समावेशन रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है। 40% के PSL लक्ष्य ने निश्चित रूप से वंचित क्षेत्रों को ऋण पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, इसकी कार्यान्वयन चुनौतियों को दूर करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो बैंकों की व्यावसायिक व्यवहार्यता और सामाजिक उद्देश्यों दोनों का ध्यान रखे।
भविष्य में, प्रौद्योगिकी के समन्वय, नीतिगत लचीलेपन, संस्थागत सहयोग और मजबूत निगरानी तंत्र के माध्यम से PSL को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे न केवल वित्तीय समावेशन को बल मिलेगा, बल्कि देश के सतत और समावेशी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: PSL का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A: PSL का मुख्य उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण किन्तु वंचित क्षेत्रों (जैसे कृषि, MSME, शिक्षा) को पर्याप्त और समय पर बैंक ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
Q2: क्या सभी बैंकों के लिए PSL लक्ष्य समान हैं?
A: नहीं, विभिन्न प्रकार के बैंकों के लिए अलग-अलग PSL लक्ष्य हैं:
सामान्य वाणिज्यिक बैंक: 40%
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक: 75%
लघु वित्त बैंक: 75%
विदेशी बैंक: 40% (भारतीय परिसंपत्तियों के आधार पर)
Q3: अगर कोई बैंक PSL लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता तो क्या होता है?
A: बैंक को कमी की राशि को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण कोष (PSLC) में जमा करना होता है। इसके अतिरिक्त, RBI बैंक पर जुर्माना भी लगा सकता है और उसे विभिन्न प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
Q4: MSME क्षेत्र के लिए PSL लक्ष्य क्या है?
A: MSME क्षेत्र के लिए कुल PSL का 7.5% निर्धारित है, जिसमें सूक्ष्म उद्यमों को प्राथमिकता दी जाती है।
Q5: क्या आवास ऋण PSL के अंतर्गत आता है?
A: हां, किफायती आवास ऋण (शहरी क्षेत्रों में 35 लाख रुपये तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 लाख रुपये तक) PSL के अंतर्गत आते हैं।
Q6: PSL ऋणों पर ब्याज दर सामान्य ऋणों से कम होती है?
A: जरूरी नहीं है। PSL ऋणों पर ब्याज दर बाजार दरों के अनुसार होती है, हालांकि सरकार कुछ विशिष्ट योजनाओं के लिए सब्सिडी प्रदान करती है।
Q7: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) क्या PSL लक्ष्यों के अधीन हैं?
A: वर्तमान में, NBFCs पर PSL लक्ष्य अनिवार्य नहीं हैं, लेकिन वे PSL ऋण दे सकती हैं और कुछ विशेष श्रेणियों में उनके ऋण PSL के रूप में गिने जाते हैं।
Q8: PSL ऋणों में डिफॉल्ट की दर अधिक क्यों है?
A: PSL ऋणों में डिफॉल्ट दर अधिक होने के कई कारण हैं: मौसमी जोखिम (कृषि), बाजार अनिश्चितता, लघु उद्यमों की वित्तीय अनियमितता, और कुछ मामलों में ऋण मूल्यांकन में कमजोरियाँ।
Q9: क्या PSL लक्ष्यों में हाल ही में कोई बदलाव हुआ है?
A: हां, RBI समय-समय पर PSL दिशा-निर्देशों में संशोधन करता है। हाल के वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, स्टार्टअप्स और सामाजिक अवसंरचना जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
Q10: छोटे और सीमांत किसानों के लिए क्या विशेष प्रावधान हैं?
A: कृषि PSL का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों के लिए आरक्षित है। इन्हें 1 लाख रुपये तक के ऋण प्राथमिकता के आधार पर मिलते हैं, और कई सरकारी योजनाओं के तहत ब्याज सब्सिडी भी प्राप्त होती है।