बैंकिंग लोकपाल योजना (Banking Ombudsman Scheme)

परिचय एवं ऐतिहासिक विकास

प्रारंभ और विकास यात्रा

बैंकिंग लोकपाल योजना भारतीय बैंकिंग प्रणाली में ग्राहक संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी शुरुआत 1995 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा की गई थी। यह योजना बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतों के त्वरित और निष्पक्ष निपटान के लिए एक वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र प्रदान करती है।

ऐतिहासिक विकासक्रम:

  1. 1995: पहली बार बैंकिंग लोकपाल योजना लागू हुई

  2. 2002: योजना में प्रथम संशोधन

  3. 2006: द्वितीय संशोधन – कार्यक्षेत्र का विस्तार

  4. 2017: तृतीय संशोधन – डिजिटल बैंकिंग शिकायतों को शामिल किया गया

  5. 2021: नवीनतम संशोधन – 10 नवंबर 2021 से प्रभावी

विकास के प्रमुख चरण:

प्रथम चरण (1995-2002):

  • केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और निर्धारित विदेशी बैंक शामिल

  • सीमित प्रकार की शिकायतें

  • प्रारंभिक चरण में सीमित जागरूकता

द्वितीय चरण (2002-2006):

  • सभी वाणिज्यिक बैंकों को शामिल किया गया

  • शिकायतों के दायरे का विस्तार

  • लोकपाल के अधिकारों में वृद्धि

तृतीय चरण (2006-2017):

  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों को शामिल किया गया

  • नए प्रकार की शिकायतों को जोड़ा गया

  • ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा

चतुर्थ चरण (2017-वर्तमान):

  • डिजिटल बैंकिंग शिकायतों को शामिल किया गया

  • मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित मुद्दे

  • कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन प्रक्रियाओं पर जोर

संगठनात्मक संरचना एवं पदाधिकारी

लोकपाल की नियुक्ति और योग्यता

RBI बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति करता है, जो आमतौर पर:

  • पूर्व बैंक अधिकारी (महाप्रबंधक या उच्च पद)

  • न्यायिक या प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति

  • न्यूनतम 55 वर्ष की आयु सीमा

लोकपाल कार्यालयों का नेटवर्क

वर्तमान में भारत में 22 बैंकिंग लोकपाल कार्यालय हैं जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों को कवर करते हैं:

  1. अहमदाबाद – गुजरात

  2. बेंगलुरु – कर्नाटक

  3. भोपाल – मध्य प्रदेश

  4. भुवनेश्वर – ओडिशा

  5. चंडीगढ़ – चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा

  6. चेन्नई – तमिलनाडु

  7. देहरादून – उत्तराखंड

  8. दिल्ली – दिल्ली

  9. गुवाहाटी – पूर्वोत्तर राज्य

  10. हैदराबाद – तेलंगाना

  11. जयपुर – राजस्थान

  12. कानपुर – उत्तर प्रदेश

  13. कोलकाता – पश्चिम बंगाल

  14. लखनऊ – उत्तर प्रदेश

  15. मुंबई – महाराष्ट्र

  16. पटना – बिहार

  17. तेजपुर – असम

  18. त्रिवेंद्रम – केरल

  19. जम्मू – जम्मू और कश्मीर

कार्यालय का कर्मचारी वर्ग

  • लोकपाल (अध्यक्ष)

  • उप लोकपाल

  • कानूनी सलाहकार

  • सहायक कर्मचारी

  • तकनीकी विशेषज्ञ

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

चरण 1: बैंक से शिकायत

  • शिकायत पहले संबंधित बैंक में दर्ज करें

  • बैंक को 30 दिनों के भीतर जवाब देना आवश्यक

  • यदि बैंक जवाब न दे या समाधान न करे तो अगले चरण पर जाएँ

चरण 2: लोकपाल को शिकायत

  • शिकायत ऑनलाइन या ऑफलाइन दर्ज करें

  • आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें

  • शिकायत बैंक की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के 1 वर्ष के भीतर दर्ज करें

चरण 3: शिकायत की प्राप्ति और स्वीकृति

  • लोकपाल कार्यालय शिकायत प्राप्ति की पुष्टि करता है

  • शिकायत योग्यता मानदंडों की जाँच

  • स्वीकृत शिकायतों के लिए कार्यवाही प्रारंभ

चरण 4: जाँच और सुनवाई

  • बैंक को नोटिस जारी किया जाता है

  • दोनों पक्षों से जवाब मांगा जाता है

  • आवश्यकतानुसार सुनवाई की जाती है

चरण 5: निर्णय और आदेश

  • लोकपाल द्वारा निर्णय

  • मुआवजे या सुधारात्मक कार्रवाई का आदेश

  • 3 महीने के भीतर निर्णय लेने का प्रयास

चरण 6: निर्णय का अनुपालन

  • बैंक को 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन करना होता है

  • अनुपालन रिपोर्ट लोकपाल को प्रस्तुत करनी होती है

शिकायत दर्ज करने के तरीके

1. ऑनलाइन पोर्टल:

  • RBI के “CMS” (Centralized Grievance Redressal Mechanism) पोर्टल पर

  • लिंक: https://cms.rbi.org.in

  • 24×7 उपलब्धता

2. ईमेल द्वारा:

  • संबंधित लोकपाल कार्यालय के ईमेल पते पर

  • दस्तावेज स्कैन करके संलग्न करें

3. डाक द्वारा:

  • संबंधित लोकपाल कार्यालय को पत्र भेजकर

  • सभी दस्तावेजों की प्रतिलिपि संलग्न करें

4. व्यक्तिगत रूप से:

  • लोकपाल कार्यालय में जाकर

  • आवेदन पत्र जमा करके

आवश्यक दस्तावेज

  1. शिकायत पत्र (निर्धारित प्रारूप में)

  2. बैंक खाता विवरण

  3. बैंक से पत्राचार की प्रतिलिपियाँ

  4. पहचान प्रमाण

  5. अन्य संबंधित दस्तावेज

शिकायत के लिए समय सीमा

  • बैंक की प्रतिक्रिया मिलने के 1 वर्ष के भीतर

  • विशेष परिस्थितियों में समय सीमा बढ़ाई जा सकती है

कार्यक्षेत्र और सीमाएँ

कार्यक्षेत्र (योजना के अंतर्गत शिकायतें)

2021 संशोधित योजना के अनुसार निम्नलिखित शिकायतें शामिल हैं:

A. सेवा संबंधी शिकायतें:

  1. जमा खाते:

    • बचत, चालू, सावधि जमा खातों से संबंधित

    • ब्याज भुगतान में देरी या गलती

    • समय से खाता बंद न करना

  2. ऋण और अग्रिम:

    • ऋण आवेदन का अनुचित अस्वीकरण

    • ऋण शर्तों में बदलाव

    • ऋण खाते का गलत वर्गीकरण

  3. कार्ड सेवाएँ:

    • क्रेडिट/डेबिट कार्ड से संबंधित शिकायतें

    • अनधिकृत लेनदेन

    • कार्ड ब्लॉक करने में देरी

  4. भुगतान और संग्रह:

    • चेक, ड्राफ्ट, NEFT, RTGS, UPI में समस्या

    • भुगतान संग्रह में देरी

    • गलत खाते में भुगतान

B. शुल्क और शुल्क संबंधी शिकायतें:

  1. अनावश्यक शुल्क वसूलना

  2. शुल्क की पारदर्शिता का अभाव

  3. सेवा प्रदान किए बिना शुल्क वसूलना

C. डिजिटल बैंकिंग शिकायतें:

  1. इंटरनेट बैंकिंग:

    • लॉगिन समस्याएँ

    • अनधिकृत लेनदेन

    • तकनीकी खराबी

  2. मोबाइल बैंकिंग:

    • ऐप क्रैश होना

    • लेनदेन विफलता

    • OTP प्राप्त न होना

  3. ई-वॉलेट और भुगतान बैंक:

    • रिचार्ज समस्याएँ

    • रिफंड में देरी

    • खाता ब्लॉक होना

D. ग्राहक सेवा संबंधी शिकायतें:

  1. गोपनीयता उल्लंघन:

    • ग्राहक डेटा का दुरुपयोग

    • अनधिकृत कॉल और संदेश

  2. भेदभावपूर्ण व्यवहार:

    • ग्राहक के साथ दुर्व्यवहार

    • भेदभावपूर्ण सेवा

  3. जानकारी का अभाव:

    • उत्पाद विवरण न देना

    • शर्तों को छिपाना

E. अन्य शिकायतें:

  1. बीमा उत्पाद:

    • बैंक द्वारा बेचे गए बीमा उत्पाद

    • दावा निपटान में देरी

  2. म्यूचुअल फंड:

    • गलत सलाह देना

    • कमीशन-आधारित बिक्री

  3. पेंशन योजनाएँ:

    • पेंशन भुगतान में देरी

    • रिकॉर्ड में गलती

मुआवजे के प्रकार

लोकपाल निम्नलिखित प्रकार के मुआवजे का आदेश दे सकता है:

  1. वास्तविक वित्तीय हानि: ₹20 लाख तक

  2. मानसिक कष्ट और कठिनाई: ₹1 लाख तक

  3. कुल मुआवजा: ₹20 लाख से अधिक नहीं

सीमाएँ और अपवाद

योजना के दायरे से बाहर के मामले:

  1. व्यावसायिक निर्णय:

    • ऋण स्वीकृति या अस्वीकृति

    • ब्याज दर निर्धारण

    • व्यवसाय संबंधी नीतियाँ

  2. अपराध संबंधी मामले:

    • धोखाधड़ी या जालसाजी

    • आपराधिक कृत्य

    • इनकी जाँच पुलिस या अदालत करती है

  3. मुकदमेबाजी वाले मामले:

    • अदालत में लंबित मामले

    • कर्ज माफी योजनाएँ

  4. समय सीमा से बाहर:

    • 1 वर्ष से अधिक पुरानी शिकायतें

    • बिना समय सीमा विस्तार के

  5. गुमनाम शिकायतें:

    • बिना नाम और पते की शिकायतें

    • अस्पष्ट या अधूरी शिकायतें

  6. अस्पष्ट शिकायतें:

    • तथ्यों का अभाव

    • निराधार आरोप

  7. विदेशी मुद्रा लेनदेन:

    • FEMA उल्लंघन

    • विदेशी मुद्रा नियमों से संबंधित

  8. राजनीतिक या धार्मिक मामले:

    • गैर-बैंकिंग मुद्दे

    • व्यक्तिगत विवाद

हाल के संशोधन और परिवर्तन (2021 संशोधन)

प्रमुख परिवर्तन

1. मुआवजे की सीमा में वृद्धि:

  • पहले: ₹10 लाख तक

  • अब: ₹20 लाख तक (वित्तीय हानि)

  • मानसिक कष्ट: ₹1 लाख तक

2. बैंकों के दायरे का विस्तार:

  • सभी प्रकार के बैंक शामिल

  • भुगतान बैंक और छोटे वित्त बैंक

  • सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

3. डिजिटल बैंकिंग शिकायतें:

  • मोबाइल बैंकिंग/इंटरनेट बैंकिंग

  • डिजिटल भुगतान सेवाएँ

  • साइबर सुरक्षा उल्लंघन

4. प्रक्रिया में सुधार:

  • ई-मेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति

  • ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा

  • डिजिटल दस्तावेजों की स्वीकार्यता

5. नए प्रकार की शिकायतें शामिल:

  • डेटा गोपनीयता उल्लंघन

  • स्पैम कॉल और संदेश

  • गलत सलाह के आधार पर बिक्री

कोविड-19 संबंधी विशेष प्रावधान

1. ऋण पुनर्गठन:

  • कोविड प्रभावित उधारकर्ताओं के लिए

  • ऋण पुनर्गठन संबंधी शिकायतें

2. डिजिटल प्रक्रियाएँ:

  • पूरी तरह ऑनलाइन कार्यवाही

  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा सुनवाई

  • ई-स्वाक्षरित दस्तावेज

3. समय सीमा में छूट:

  • कोविड अवधि के लिए विशेष प्रावधान

  • देरी के लिए दंड में छूट

प्रौद्योगिकी एकीकरण

1. CMS पोर्टल में सुधार:

  • उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस

  • रीयल-टाइम ट्रैकिंग

  • मोबाइल ऐप एकीकरण

2. ऑटोमेशन:

  • शिकायत वर्गीकरण

  • स्वचालित अनुस्मारक

  • डैशबोर्ड और विश्लेषण

3. डेटा सुरक्षा:

  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन

  • डेटा गोपनीयता मानक

  • साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल

सांख्यिकीय डेटा और प्रदर्शन

2022-23 का वार्षिक प्रदर्शन

  1. कुल शिकायतें प्राप्त: 4,18,184

  2. निपटाए गए मामले: 4,05,309

  3. निपटान दर: 97%

  4. मुआवजे की राशि: ₹150 करोड़+

  5. औसत निपटान समय: 45 दिन

शीर्ष शिकायतें (2022-23)

  1. एटीएम/डेबिट कार्ड संबंधी: 25%

  2. मोबाइल/इंटरनेट बैंकिंग: 20%

  3. ऋण और अग्रिम: 15%

  4. जमा खाते: 12%

  5. क्रेडिट कार्ड: 10%

क्षेत्रीय विश्लेषण

  1. महाराष्ट्र: 15% शिकायतें

  2. उत्तर प्रदेश: 12%

  3. दिल्ली: 10%

  4. तमिलनाडु: 8%

  5. कर्नाटक: 7%

ग्राहकों के लिए सुझाव

शिकायत दर्ज करने से पहले:

  1. बैंक के शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग करें

  2. सभी दस्तावेज तैयार रखें

  3. समय सीमा का ध्यान रखें

  4. स्पष्ट और संक्षिप्त शिकायत लिखें

प्रभावी शिकायत लिखने के टिप्स:

  1. तथ्यात्मक और वस्तुनिष्ठ भाषा का प्रयोग

  2. दिनांक और समय का उल्लेख

  3. बैंक कर्मचारियों के नाम (यदि ज्ञात हों)

  4. वित्तीय हानि का विवरण

  5. अपेक्षित समाधान

मामला जीतने के लिए:

  1. सबूतों का संग्रह (ईमेल, रसीद, बैंक स्टेटमेंट)

  2. बैंक के साथ पत्राचार की कॉपियाँ

  3. वित्तीय नुकसान का दस्तावेजीकरण

  4. समय सीमा का पालन

भविष्य की दिशाएँ

प्रस्तावित सुधार:

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग:

    • शिकायत वर्गीकरण में AI

    • स्वचालित निपटान प्रणाली

    • भविष्यवाणी संबंधी विश्लेषण

  2. ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी:

    • शिकायत रिकॉर्ड का सुरक्षित भंडारण

    • पारदर्शी निपटान प्रक्रिया

    • स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स

  3. विस्तारित कार्यक्षेत्र:

    • NBFCs को शामिल करना

    • फिनटेक कंपनियों के लिए अलग प्रकोष्ठ

    • क्रॉस-बॉर्डर बैंकिंग शिकायतें

  4. प्रक्रिया सरलीकरण:

    • वन-स्टॉप समाधान

    • मोबाइल ऐप आधारित निपटान

    • रीयल-टाइम अपडेट

चुनौतियाँ और समाधान:

  1. जागरूकता की कमी:

    • जागरूकता अभियान चलाना

    • वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम

    • स्कूल और कॉलेज स्तर पर शिक्षा

  2. विभिन्न भाषाओं में सुविधा:

    • बहुभाषी पोर्टल

    • स्थानीय भाषाओं में सामग्री

    • अनुवाद सेवाएँ

  3. ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच:

    • मोबाइल लोकपाल इकाइयाँ

    • बैंकिंग संवाददाताओं के माध्यम से पहुँच

    • टोल-फ्री हेल्पलाइन

निष्कर्ष

बैंकिंग लोकपाल योजना भारतीय बैंकिंग प्रणाली में ग्राहक संरक्षण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। 1995 में अपनी स्थापना के बाद से, इस योजना ने लाखों ग्राहकों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2021 के संशोधनों ने इसे और अधिक प्रभावी और समकालीन बनाया है।

योजना की सफलता इसकी सरल प्रक्रिया, त्वरित निपटान और निष्पक्षता में निहित है। हालाँकि, चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, विशेष रूप से जागरूकता की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित पहुँच के संदर्भ में।

भविष्य में, प्रौद्योगिकी एकीकरण, प्रक्रिया सरलीकरण और दायरे के विस्तार के माध्यम से बैंकिंग लोकपाल योजना और अधिक प्रभावी हो सकती है। ग्राहकों के लिए यह जानना आवश्यक है कि उनके अधिकार क्या हैं और उनकी शिकायतों का समाधान कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

एक मजबूत ग्राहक संरक्षण तंत्र न केवल ग्राहकों के हित में है बल्कि बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता और स्थिरता के लिए भी आवश्यक है। बैंकिंग लोकपाल योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो बैंकों और ग्राहकों के बीच विश्वास का सेतु बनाती है।


बैंकिंग लोकपाल योजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सामान्य जानकारी:

Q1. बैंकिंग लोकपाल योजना क्या है?
A: यह एक ग्राहक संरक्षण योजना है जो बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतों का निपटारा करती है।

Q2. इसकी शुरुआत कब हुई?
A: 1995 में RBI द्वारा शुरू की गई।

Q3. नवीनतम संशोधन कब हुआ?
A: 10 नवंबर 2021 को नवीनतम संशोधन हुआ।

पात्रता और दायरा:

Q4. कौन बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत कर सकता है?
A: कोई भी बैंक ग्राहक जिसकी बैंक के साथ शिकायत है।

Q5. कौन से बैंक इसके दायरे में आते हैं?
A: सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, भुगतान बैंक और छोटे वित्त बैंक।

Q6. NBFCs के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं?
A: नहीं, NBFCs इस समय दायरे में नहीं हैं।

शिकायत प्रक्रिया:

Q7. शिकायत कैसे दर्ज करें?
A:

  1. पहले बैंक से शिकायत करें

  2. यदि संतुष्ट न हों तो लोकपाल को ऑनलाइन/ऑफलाइन शिकायत दर्ज करें

Q8. ऑनलाइन शिकायत कहाँ दर्ज करें?
A: RBI के CMS पोर्टल पर: https://cms.rbi.org.in

Q9. कौन से दस्तावेज चाहिए?
A: शिकायत पत्र, बैंक विवरण, पत्राचार की कॉपी, पहचान प्रमाण।

Q10. शिकायत की समय सीमा क्या है?
A: बैंक की प्रतिक्रिया मिलने के 1 वर्ष के भीतर।

प्रक्रिया और समय सीमा:

Q11. शिकायत निपटान में कितना समय लगता है?
A: आमतौर पर 30-90 दिन, लेकिन जटिल मामलों में अधिक समय लग सकता है।

Q12. लोकपाल का निर्णय कब तक आता है?
A: शिकायत दर्ज होने के 3 महीने के भीतर।

Q13. बैंक को निर्णय मानने में कितना समय है?
A: निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर।

Q14. यदि बैंक निर्णय न माने तो क्या करें?
A: लोकपाल को सूचित करें, वे आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

मुआवजा और राहत:

Q15. अधिकतम मुआवजा कितना मिल सकता है?
A: वित्तीय हानि के लिए ₹20 लाख तक और मानसिक कष्ट के लिए ₹1 लाख तक।

Q16. किस प्रकार का मुआवजा मिल सकता है?
A: वित्तीय नुकसान, मानसिक कष्ट, या दोनों।

Q17. मुआवजे के अलावा क्या राहत मिल सकती है?
A: खाता सुधार, शुल्क वापसी, ब्याज भुगतान, क्षमा याचना।

सीमाएँ और अपवाद:

Q18. कौन सी शिकायतें स्वीकार नहीं की जातीं?
A: व्यावसायिक निर्णय, आपराधिक मामले, अदालत में लंबित मामले।

Q19. ऋण अस्वीकृति की शिकायत कर सकते हैं?
A: नहीं, यह बैंक का व्यावसायिक निर्णय है।

Q20. धोखाधड़ी के मामले में क्या करें?
A: पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करें, फिर लोकपाल के पास जाएँ।

डिजिटल बैंकिंग शिकायतें:

Q21. डिजिटल बैंकिंग समस्याओं की शिकायत कर सकते हैं?
A: हाँ, मोबाइल/इंटरनेट बैंकिंग, UPI, डिजिटल भुगतान से संबंधित शिकायतें।

Q22. अनधिकृत डिजिटल लेनदेन की शिकायत कैसे करें?
A: तुरंत बैंक को सूचित करें, फिर लोकपाल को शिकायत दर्ज करें।

Q23. ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड की शिकायत कितने दिनों में करें?
A: घटना के 3 दिन के भीतर बैंक को सूचित करें, 1 वर्ष के भीतर लोकपाल को।

विशेष परिस्थितियाँ:

Q24. कोविड के दौरान ऋण पुनर्गठन की शिकायत कर सकते हैं?
A: हाँ, यदि बैंक ने RBI दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया।

Q25. बैंक दिवालिया हो गया है तो क्या करें?
A: DICGC के पास दावा करें, लोकपाल दिवालिया बैंकों के मामले भी देखता है।

अपील और समीक्षा:

Q26. लोकपाल के निर्णय के खिलाफ अपील कर सकते हैं?
A: हाँ, निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर RBI गवर्नर के पास अपील कर सकते हैं।

Q27. अपील कहाँ करें?
A: RBI के गवर्नर को, संबंधित कार्यालय के माध्यम से।

Q28. अपील की समय सीमा क्या है?
A: लोकपाल के निर्णय की प्राप्ति के 30 दिन के भीतर।

जागरूकता और शिक्षा:

Q29. बैंकिंग लोकपाल के बारे में और जानकारी कहाँ से मिलेगी?
A: RBI वेबसाइट, बैंक शाखाएँ, लोकपाल कार्यालय।

Q30. फ्री हेल्पलाइन नंबर क्या है?
A: 14440 (RBI के लिए), लेकिन लोकपाल के लिए अलग से टोल-फ्री नंबर नहीं है।

IIBF परीक्षा के लिए विशेष:

Q31. IIBF परीक्षा में बैंकिंग लोकपाल से कितने प्रश्न आते हैं?
A: JAIIB/CAIIB में 5-8 प्रश्न।

Q32. किन बिंदुओं पर फोकस करना चाहिए?
A: शिकायत प्रक्रिया, मुआवजा सीमा, नए संशोधन, कार्यक्षेत्र।

Q33. नवीनतम संशोधन में क्या बदलाव हुए?
A: मुआवजा सीमा ₹20 लाख, डिजिटल शिकायतें शामिल, सभी बैंक कवर।

Q34. कौन सी शिकायतें शामिल नहीं हैं?
A: व्यावसायिक निर्णय, आपराधिक मामले, 1 साल से अधिक पुरानी।

Q35. मोबाइल बैंकिंग फ्रॉड की शिकायत कैसे करें?
A: बैंक को तुरंत सूचित करें, शिकायत दर्ज करें, लोकपाल को जाएँ।

 
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