कृष्ण पक्ष के प्रमुख त्योहार एवं मेले
तृतीया – बड़ी तीज
अन्य नाम: बूढ़ी तीज, कजली तीज, सातुड़ी तीज
विशेष: बूंदी की बड़ी तीज प्रसिद्ध है। यह सावन के बाद की तीज होती है जिसमें महिलाएँ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
षष्ठी (छठ)
ऊब छठ, हल छठ
बलराम जयंती: कृष्ण के भाई बलराम का जन्मोत्सव
किसान अपने हल को नौ गाँठ वाली राखी बाँधते हैं।
अष्टमी – कृष्ण जन्माष्टमी
भगवान कृष्ण का जन्मदिन, पूरे राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है।
नवमी – गोगा नवमी
मेले:
ददरेवा (चुरु)
गोगामेडी (हनुमानगढ़)
लोकदेवता गोगाजी की पूजा की जाती है।
द्वादशी/वारस – शालिवाहन वारस
इस दिन बछड़े की पूजा की जाती है।
चाकू का प्रयोग वर्जित होता है।
अमावस्या – सती अमावस्या
रानी सती का मेला (झुंझुनू)
शुक्ल पक्ष के प्रमुख त्योहार एवं मेले
द्वितीया – रामदेवजी जयंती (बाबा री वीज)
मेला: रामदेवरा (जैसलमेर) – रुणीचा
द्वितीया से एकादशी तक चलने वाला विशाल मेला
मारवाड़ का कुंभ कहलाता है
धौलपुर में बाबू महाराज का मेला
चतुर्थी
गणेश चतुर्थी
शिव चतुर्थी
कलंक चतुर्थी
चतरा चौथ
मेले:
त्रिनेत्र गणेश – रणथंभौर (सवाई माधोपुर)
चूड़ी तीर्थ – जैसलमेर
पंचमी – ऋषि पंचमी
सप्तऋषियों की पूजा
माहेश्वरी समाज का रक्षाबंधन
मेले:
भोजनयाली मेला – कामां (भरतपुर)
हरीरामजी का मेला – झोरड़ा (नागौर)
अष्टमी – राधाष्टमी
मेला: सलेमाबाद (अजमेर)
निम्बार्क संप्रदाय से संबंधित
दशमी – तेजा दशमी
मेला: परबतसर (नागौर) – एक प्रसिद्ध पशु मेला
एकादशी
जलझूलनी एकादशी
देवझूलनी एकादशी
भगवान कृष्ण की मूर्तियों को स्नान कराया जाता है
मेला: चारभुजा मेला (गढ़बोर, राजसमंद)
चतुर्दशी – अनंत चतुर्दशी
गणेश विसर्जन किया जाता है
पूर्णिमा
श्राद्ध प्रारंभ
विशेष तथ्य
भाद्रपद मास राजस्थान में सर्वाधिक त्योहारों वाला महीना है।
इस माह में कृषि और पशुपालन से जुड़े कई त्योहार मनाए जाते हैं।
राजस्थान के लोक देवताओं (गोगाजी, रामदेवजी, तेजाजी) से संबंधित मुख्य पर्व इसी माह में आते हैं।
मेलों की भरमार इस माह को विशेष बनाती है।