भारतीय सुरक्षा अधिनियम और वित्तीय प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act 2002) पर एक व्यापक अध्ययन

प्रस्तावना और ऐतिहासिक संदर्भ

सदी के अंत में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र गैर-निष्पादित आस्तियों (Non-Performing Assets – NPAs) के बढ़ते बोझ से जूझ रहा था। वसूली के पारंपरिक तरीके, मुख्यतः नागरिक अदालतों के माध्यम से, बेहद धीमे, खर्चीले और अक्सर अप्रभावी साबित हो रहे थे। इस चुनौती से निपटने और वित्तीय संस्थानों को एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करने के लिए, भारतीय संसद ने सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकन्स्ट्रक्चरिंग ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिइटी इंटरेस्ट एक्ट, 2002 (SARFAESI Act) को पारित किया। यह अधिनियम 17 दिसंबर, 2002 से लागू हुआ और वित्तीय संस्थानों (FIs) और बैंकों को सुरक्षा हित (Security Interest) को लागू करने, देनदारों से गारंटीशुदा संपत्तियों को जब्त करने और बिक्री करने की शक्ति प्रदान की, बिना सिविल कोर्ट के हस्तक्षेप के, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों।

यह अधिनियम तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है:

  1. सिक्योरिटाइजेशन (Securitisation): वित्तीय संपत्तियों को प्रतिभूतियों में बदलने की प्रक्रिया।

  2. एसेट रिकंस्ट्रक्शन (Asset Reconstruction): एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) द्वारा NPA के पुनर्गठन या वसूली की प्रक्रिया।

  3. सिक्योरिटी इंटरेस्ट का एनफोर्समेंट (Enforcement of Security Interest): अधिनियम का सबसे अधिक इस्तेमाल और विवादास्पद पहलू, जो बैंकों को सीधे कार्रवाई करने का अधिकार देता है।

यह अध्ययन इन तीनों पहलुओं पर प्रकाश डालेगा, लेकिन विशेष जोर सुरक्षा हित के प्रवर्तननोटिस जारी करने और संपत्ति पर कब्जा करने की प्रक्रिया, और डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में अपील के तंत्र पर होगा।


धारा 13: सुरक्षा हित का प्रवर्तन – हृदय एवं आत्मा

अधिनियम की धारा 13 वित्तीय संस्थान को सुरक्षा हित लागू करने की शक्ति प्रदान करती है। यह प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब:

  • ऋणदाता एक “वित्तीय संस्थान” हो (जैसे बैंक, वित्तीय कंपनी, एआरसी आदि)।

  • ऋण “सुरक्षित ऋण” (secured loan) हो, यानी किसी संपत्ति (मूर्त या अमूर्त) पर गारंटी/बंधक लिया गया हो।

  • ऋण एनपीए श्रेणी में आ गया हो, जिसका अर्थ है कि मूल या ब्याज की किस्त 90 दिनों से अधिक समय से बकाया है।

  • ऋणदाता ने उधारकर्ता को देय राशि का भुगतान करने के लिए लिखित में कहा हो

प्रवर्तन प्रक्रिया: चरण-दर-चरण

1. धारा 13(2) के तहत 60 दिन का नोटिस:

  • ऋण के एनपीए बनने के बाद, वित्तीय संस्थान उधारकर्ता को एक 60-दिवसीय नोटिस जारी करता है।

  • इस नोटिस में बकाया राशि का विवरण, उधारकर्ता को देनदारी निपटाने का अवसर, और अगर वह ऐसा नहीं करता है तो संपत्ति कब्जे में लेने/बेचने का इरादा स्पष्ट किया जाता है।

  • यह नोटिस संयुक्त उधारकर्ताओं, गारंटरों (गारंटर) और संपत्ति के मालिकों सभी को भेजा जाता है।

2. उधारकर्ता/गारंटर का प्रतिनिधित्व (धारा 13(3A)):

  • नोटिस मिलने के बाद, उधारकर्ता या गारंटर वित्तीय संस्थान के पास किसी भी आपत्ति या प्रतिनिधित्व को भेज सकता है।

  • वित्तीय संस्थान को इस प्रतिनिधित्व पर 15 दिनों के भीतर विचार करना होगा और उधारकर्ता को जवाब देना होगा। अगर आपत्ति खारिज होती है, तो कारण बताने होते हैं।

3. प्रतिनिधित्व खारिज होने के बाद की कार्रवाई (धारा 13(4)):

  • अगर उधारकर्ता 60-दिवसीय नोटिस की समाप्ति के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं करता या प्रतिनिधित्व खारिज हो जाता है, तो वित्तीय संस्थान निम्नलिखित में से कोई भी या सभी कार्रवाई कर सकता है:

    • संपत्ति का कब्जा लेना: इसमें ऋण के लिए गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्जा शामिल है।

    • प्रबंधक (Manager) नियुक्त करना: संपत्ति के प्रबंधन और संरक्षण के लिए।

    • संपत्ति की बिक्री या पट्टे (Lease) पर देना: बकाया राशि वसूलने के लिए।

    • अधिकारों, शीर्षक (Title), या ब्याग की बिक्री के लिए नोटिस जारी करना।

4. संपत्ति पर कब्जा (Possession):

  • धारा 14 के तहत, वित्तीय संस्थान संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए मुख्य महानगर दंडाधिकारी (CMM) या जिला दंडाधिकारी (DM) से सहायता मांग सकता है।

  • CMM/DM को 30 दिनों के भीतर वित्तीय संस्थान को संपत्ति पर कब्जा दिलाने में मदद करने का आदेश जारी करना होता है।

  • कब्जा लेने के बाद, धारा 13(8) के तहत, उधारकर्ता कब्जा लेने की तारीख से किसी भी समय बकाया राशि का भुगतान करके अपनी संपत्ति वापस पा सकता है।

5. संपत्ति की बिक्री:

  • संपत्ति की बिक्री सार्वजनिक नीलामी या निजी संविदा के माध्यम से की जा सकती है।

  • बिक्री की सूचना कम से कम 30 दिन पहले दो समाचार पत्रों (एक स्थानीय भाषा का) में देनी होती है।

  • बिक्री से प्राप्त राशि को पहले बैंक के दावे और फिर अन्य दावेदारों के दावों के निपटान में लगाया जाता है। शेष राशि (यदि कोई हो) उधारकर्ता को लौटा दी जाती है।


डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में अपील और अपीलीय उपचार

अधिनियम संतुलन बनाते हुए उधारकर्ता को कानूनी उपचार का अधिकार भी देता है।

1. धारा 17 के तहत DRT में अपील:

  • उधारकर्ता या गारंटर, धारा 13(4) के तहत की गई किसी भी कार्रवाई के खिलाफ, संबंधित क्षेत्राधिकार वाले डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में अपील कर सकता है।

  • ऐसी अपील कार्रवाई की तारीख से 45 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए। DRT “पर्याप्त कारण” होने पर इस अवधि को बढ़ा सकता है।

  • DRT अपील दायर करने पर, यह धारा 13(4) के तहत की गई कार्रवाई को तब तक रोक (Stay) नहीं देगा, जब तक कि उधारकर्ता DRT द्वारा निर्धारित राशि (आमतौर पर बकाया का 25-50%) जमा नहीं करता। यह जमा राशि अपील के निपटारे तक बनी रहती है।

  • DRT कार्रवाई की वैधता की जांच करेगा और निर्णय देगा कि क्या यह अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है। अगर DRT पाता है कि कार्रवाई गलत थी, तो वह संपत्ति उधारकर्ता को वापस कर सकता है और बैंक को नुकसान की भरपाई भी करवा सकता है।

2. DRT के आदेश के खिलाफ DRAT में अपील:

  • DRT के आदेश से असंतुष्ट कोई भी पक्ष (उधारकर्ता या वित्तीय संस्थान) डेट रिकवरी अपीलीय ट्रिब्यूनल (DRAT) में अपील कर सकता है।

  • ऐसी अपील DRT के आदेश की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए।

  • DRAT में अपील केवल तभी स्वीकार की जाएगी जब अपीलकर्ता DRT द्वारा निर्धारित राशि जमा करे, जब तक DRAT इस जमा राशि को माफ न कर दे।

3. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप:

  • सामान्य नियम यह है कि सिविल न्यायालयों का SARFAESI प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होता (धारा 34)

  • हालांकि, संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन या कानून के बुनियादी सिद्धांतों (जैसे न्यायिक समीक्षा) के मुद्दों पर, उधारकर्ता उच्च न्यायालय (रिट याचिका के माध्यम से) या सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। लेकिन यह मार्ग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही खुलता है।


अन्य प्रमुख प्रावधान

  • सिक्योरिटाइजेशन (धारा 2(1)(z), धारा 5-7): यह वित्तीय संस्थान को अपनी ऋण संपत्तियों (जैसे होम लोन, ऑटो लोन का पूल) को एकत्रित करके उन्हें विभिन्न जोखिम वाले टुकड़ों में बांटकर, निवेशकों को प्रतिभूतियां (सेक्योरिटाइज्ड डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स) जारी करने बेचने की अनुमति देता है। इससे बैंकों को तरलता मिलती है और जोखिम वितरित होता है।

  • एसेट रिकंस्ट्रक्शन (धारा 3, 9-12): अधिनियम विशेष रूप से पंजीकृत एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) के गठन का प्रावधान करता है। बैंक अपने NPAs को ARCs को बेच सकते हैं, जो विशेषज्ञता के साथ इन ऋणों की वसूली या पुनर्गठन करते हैं। ARCs सुरक्षा प्राप्त संपत्तियों (SRs) को जारी करके इन NPAs के लिए भुगतान करते हैं।


महत्व, आलोचनाएं और नवीनतम विकास

महत्व:

  • वित्तीय संस्थानों के लिए NPA के खिलाफ एक तेज और प्रभावी उपाय।

  • सिविल कोर्ट के मुकदमों में कमी।

  • ऋण संस्कृति में सुधार, क्योंकि उधारकर्ता जानते हैं कि डिफॉल्ट करने पर त्वरित कार्रवाई हो सकती है।

  • वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता और स्वास्थ्य में योगदान।

आलोचनाएं और चुनौतियां:

  • शक्ति का असंतुलन: इसे अक्सर “बैंक-पक्षीय” बताया जाता है, जहां उधारकर्ता के पास सीमित उपाय होते हैं।

  • दुरुपयोग की संभावना: गैर-एनपीए खातों पर या प्रक्रिया का पालन किए बिना ही कार्रवाई के मामले सामने आए हैं।

  • CMM/DM की भूमिका में देरी: धारा 14 के तहत, CMM/DM कार्यालयों में भीड़ और प्रशासनिक देरी के कारण कई बार कब्जे की प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है।

  • MSME क्षेत्र पर प्रभाव: छोटे उद्योगों ने अक्सर शिकायत की है कि यह अधिनियम उनकी व्यावसायिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

नवीनतम विकास और संशोधन:

  • 2016 का संशोधन: इसमें बड़े डिफॉल्टरों (₹500 करोड़ से अधिक) के खिलाफ कठोर प्रावधान जोड़े गए।

  • 2020 का COVID-19 राहत: SARFAESI कार्रवाई पर अस्थायी रोक (मोरेटोरियम) लगाया गया।

  • न्यायिक व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि बैंकों को अधिनियम की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना चाहिए और DRT को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधारकर्ता के अधिकारों का हनन न हो।


सामान्य प्रश्न (FAQs)

1. क्या कोई बैंक बिना नोटिस के मेरी संपत्ति पर कब्जा कर सकता है?

  • नहीं, बिल्कुल नहीं। धारा 13(2) के तहत 60 दिन का नोटिस जारी करना अनिवार्य पहला कदम है। बिना नोटिस के कोई कार्रवाई अवैध होगी।

2. अगर मैं ऋण चुकाने में असमर्थ हूं, तो मुझे नोटिस मिलने पर क्या करना चाहिए?

  • तुरंत अपने वकील से परामर्श लें।

  • वित्तीय संस्थान के पास प्रतिनिधित्व (Representation) भेजें, अपनी वित्तीय स्थिति स्पष्ट करें और पुनर्गठन (Restructuring) या निपटान (Settlement) का प्रस्ताव रखें।

  • अगर कार्रवाई हो चुकी है, तो 45 दिनों के भीतर DRT में अपील दायर करें।

3. क्या आवासीय संपत्ति को SARFAESI के तहत कब्जे में लिया जा सकता है?

  • हां, अगर यह ऋण के लिए गिरवी रखी गई है और ऋण एनपीए बन गया है। हालांकि, DRT/अदालतें मानवीय आधार पर या प्रक्रियागत कमियों के आधार पर राहत दे सकती हैं, खासकर अगर यह एकमात्र आवास है।

4. SARFAESI नोटिस के बाद भी, क्या मैं अपना ऋण निपटान (Settlement) कर सकता हूं?

  • हां, धारा 13(8) के तहत, संपत्ति की बिक्री से पहले किसी भी समय, उधारकर्ता पूरी बकाया राशि (ब्याज और लागत सहित) का भुगतान करके संपत्ति वापस पाने का हकदार है। बैंक के साथ एकमुश्त निपटान (One-Time Settlement – OTS) पर भी बातचीत की जा सकती है।

5. DRT में अपील करने की लागत क्या है?

  • DRT में अपील दायर करने के लिए एक निश्चित कोर्ट फीस (जो दावे की राशि पर निर्भर करती है) देनी होती है। सबसे बड़ी लागत प्री-डिपॉजिट की होती है, जो बकाया राशि का 25-50% तक हो सकती है, जिसके बिना अपील पर स्टे ऑर्डर नहीं मिलता।

6. क्या सभी प्रकार के ऋण SARFAESI के दायरे में आते हैं?

  • नहीं। यह अधिनियम केवल सुरक्षित ऋणों पर लागू होता है। अनसेक्योर्ड लोन (बिना गारंटी के), कृषि ऋण, और ₹1 लाख से कम के ऋण इसके दायरे से बाहर हैं।

7. अगर मैं यह मानता हूं कि मेरा ऋण एनपीए नहीं है, तो मैं क्या कर सकता हूं?

  • आप धारा 13(3A) के तहत अपने प्रतिनिधित्व में यह तर्क दे सकते हैं। अगर इसे खारिज कर दिया जाता है, तो आप DRT में अपील कर सकते हैं और यह साबित कर सकते हैं कि ऋण एनपीए श्रेणी में नहीं आता, और इस तरह की कोई भी कार्रवाई अवैध है।

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