माघ मास के त्योहार एवं मेले

कृष्ण पक्ष

  1. चतुर्थी – तिल चतुर्थी (संकट हरण चतुर्थी)

    • मेला: चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)

    • तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

    • संकट दूर करने हेतु गणेश पूजन।

  2. एकादशी – षट्तिला एकादशी

    • 6 प्रकार के तिल (तिल का तेल, तिल के लड्डू आदि) का उपयोग कर पूजा।

    • पितृदोष शांति के लिए विशेष महत्व।

  3. अमावस्या – मौनी अमावस्या

    • कुंभ मेले का शाही स्नान (यदि कुंभ इसी माह में हो)।

    • मौन रहकर स्नान व दान का विधान।

शुक्ल पक्ष

  1. प्रतिपदा (एकम) – गुप्त नवरात्र प्रारंभ

    • तांत्रिक साधनाओं हेतु शुभ माना जाता है।

  2. पंचमी – वसंत पंचमी (सरस्वती जयंती)

    • शिक्षा एवं कला की देवी सरस्वती की पूजा।

    • गार्गी पुरस्कार: राजस्थान सरकार द्वारा महिला शिक्षाविदों को दिया जाने वाला सम्मान।

    • पीले रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा।

  3. पूर्णिमा – बेणेश्वर मेला (नवाटापरा, डूंगरपुर)

    • “आदिवासियों का कुंभ” या “वागड़ का पुष्कर” कहलाता है।

    • संगम स्थल: माही + सोम + जाखम नदियों का मिलन।

    • विशेषताएँ:

      • खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है।

      • संत मावजी द्वारा स्थापित धाम।

      • जनक कुंवरी ने विष्णु मंदिर बनवाया।

      • अबै तया वजे ने लक्ष्मीनारायण मंदिर की स्थापना की।

    • भील आदिवासियों की सक्रिय भागीदारी।

राजस्थान से जुड़ी अनूठी परंपराएँ

  • माघी पूर्णिमा पर बेणेश्वर धाम में आदिवासी गमेडी नृत्य व लोकगीतों का आयोजन।

  • वसंत पंचमी पर जयपुर में पतंगबाज़ी का विशेष आनंद।

विशेष तथ्य

  • तिल चतुर्थी पर चूहों को भोग लगाने की परंपरा (गणेश जी के वाहन के रूप में)।

  • बेणेश्वर मेला राजस्थान का द्वितीय सबसे बड़ा आदिवासी समागम है (पहला बांसवाड़ा का होली मेला)।

माघ मास: आध्यात्मिक साधना और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम!

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