Table of Contents
कार्बोनिफेरस युग में, अल्फ्रेड वेगनर के सिद्धांत के अनुसार, सभी महाद्वीप एक संयुक्त सुपरमहाद्वीप में जुड़े हुए थे, जिसे पैंजिया (Pangea) कहा जाता है।
पैंजिया दो मुख्य भागों में विभाजित था:
( 1 )उत्तरी भाग (अंगारालैंड / लॉरेंशिया):
इसमें वर्तमान के उत्तरी अमेरिका, यूरोप और उत्तरी एशिया के महाद्वीप शामिल थे।
( 2 )दक्षिणी भाग (गोंडवानालैंड):
इसमें वर्तमान के दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिणी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के महाद्वीप शामिल थे।
इन दोनों भूभागों के बीच टेथिस सागर (Tethys Sea) नामक एक विशाल समुद्र (भूसन्नति) स्थित था।
राजस्थान की उत्पत्ति टेथिस सागर के अवसादों के उत्थान के परिणामस्वरूप हुई मानी जाती है।
1. पैंथालासा (Panthalassa):
अल्फ्रेड वेगनर के अनुसार, पैंजिया महाद्वीप को चारों ओर से घेरने वाले विशाल वैश्विक महासागर को पैंथालासा कहा जाता था। वर्तमान का प्रशांत महासागर इसका अवशेष है।
2. गोंडवाना लैंड (Gondwana Land):
यह पैंजिया महाद्वीप का दक्षिणी भाग था, न कि कोई अलग महासागर।
3. टेथिस सागर (Tethys Sea):
यह एक भूसन्नति (Geosyncline) थी, जो अंगारालैंड (उत्तरी भाग) और गोंडवानालैंड (दक्षिणी भाग) के बीच स्थित थी।
इसके अवशेष वर्तमान की भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर और काला सागर हैं।
हिमालय पर्वत श्रृंखला, उत्तरी भारत का विशाल मैदान और थार का मरुस्थल टेथिस सागर में जमा हुए अवसादों के उत्थान से बने हैं।
4. राजस्थान के भूगोल का निर्माण:
राजस्थान का निर्माण तीन मुख्य भागों से हुआ है, जिनकी उत्पत्ति अलग-अलग भूगर्भिक काल में हुई:
अरावली पर्वतश्रेणी: यह प्रायद्वीपीय भारत के प्राचीनतम भूभाग का हिस्सा है।
पूर्वी मैदान: यह उत्तरी विशाल मैदान का हिस्सा है, जो टेथिस सागर के अवसादों से बना है और नवीनतम है।
थार का मरुस्थल: यह भी टेथिस सागर के अवसादों से निर्मित है।
पैंजिया (कार्बोनिफेरस युग)
|– उत्तरी भाग: अंगारालैंड (लॉरेंशिया)
|– दक्षिणी भाग: गोंडवानालैंड
|– बीच में: टेथिस सागर (भूसन्नति)
|– चारों ओर: पैंथालासा महासागर
→ टेथिस सागर के उत्थान से बना: हिमालय, उत्तरी मैदान, थार मरुस्थल।
→ राजस्थान का पश्चिमी मरुस्थलीय भाग और पूर्वी मैदानी भाग टेथिस सागर के अवसादों से बना है, जबकि अरावली प्राचीन प्रायद्वीपीय शील्ड का हिस्सा है।