राजस्थान में ऊर्जा के परंपरागत एवं गैर-परंपरागत स्रोत: एक संतुलित ऊर्जा मिश्रण

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ऊर्जा किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ है। आज का ‘मशीनी युग’ कृषि, उद्योग, परिवहन से लेकर घरेलू जीवन तक की लगभग हर गतिविधि को ऊर्जा पर निर्भर करता है। राजस्थान, अपने विशाल क्षेत्र और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के कारण, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों प्रकार की ऊर्जा के उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


ऊर्जा के दो मुख्य स्रोत

  1. परंपरागत स्रोत (Conventional Sources): ये वे स्रोत हैं जिनका दीर्घकाल से व्यापक उपयोग हो रहा है। इनमें जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) और जलविद्युत प्रमुख हैं। ये सीमित भंडार वाले और प्रदूषणकारी हैं।

  2. गैर-परंपरागत स्रोत (Non-Conventional Sources): ये नवीकरणीय और पर्यावरण-हितैषी स्रोत हैं, जो जीवाश्म ईंधनों के विकल्प के रूप में उभरे हैं। इनमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और कृषि अपशिष्ट से प्राप्त ऊर्जा शामिल हैं।


राजस्थान की अधिष्ठापित विद्युत क्षमता: एक विहंगम दृश्य

मार्च 2019 तक राजस्थान की कुल अधिष्ठापित विद्युत क्षमता 21,077.64 मेगावाट (MW) थी। दिसंबर 2019 तक इसमें 736.96 MW की वृद्धि हुई, जिससे कुल क्षमता 21,175.90 MW हो गई (इसमें 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए 638.70 MW के सौर व पवन PPA शामिल नहीं हैं)।

वर्षवार अधिष्ठापित क्षमता का विवरण (मेगावाट में):

 
 
क्र. सं.विवरण2015-162016-172017-182018-192019-20*
1. राज्य की स्वयं/भागीदारी की परियोजनाएँ      
(अ) तापीय5190.005190.005190.005850.006510.00 
(ब) जल विद्युत1017.291017.291017.291017.291017.29 
(स) गैस603.50603.50603.50603.50603.50 
योग (1)6810.796810.796810.797470.798130.79 
2. केंद्रीय परियोजनाओं से राज्य को आवंटित      
(अ) तापीय1394.411394.411793.501793.501870.46 
(ब) जल विद्युत738.79738.79738.79740.66740.66 
(स) गैस221.10221.10221.10221.10221.10 
(द) परमाणु456.74456.74456.74456.74456.74 
योग (2)2811.042811.043210.133212.003288.96 
3. पवन/बायोमास/सौर ऊर्जा परियोजनाएँ (आर.आर.ई.सी., आर.एस.एम.एम.एल. एवं निजी क्षेत्र)      
(अ) पवन3851.004123.704137.204139.203734.10 
(ब) बायोमास97.00101.95101.95101.95101.95 
(स) सौर ऊर्जा733.951193.701656.702411.702178.10 
योग (3)4681.955419.355895.856652.856014.15 
कुल योग (1+2+3)14,303.7815,041.1815,916.7717,335.6417,433.90 

(दिसंबर 2019 तक; यह आंकड़ा कुल 21,175.90 MW का हिस्सा है, शेष अन्य स्रोतों से है)*


राजस्थान के ऊर्जा स्रोतों का विश्लेषण

परंपरागत स्रोत:

  • तापीय ऊर्जा: राज्य का सबसे बड़ा आधारभूत स्रोत। कोटा, सूरतगढ़, छबड़ा, बरसिंगसर के ताप संयंत्र। केंद्रीय परियोजनाओं (सिंगरौली, दादरी, अंता, ओरैया, ऊँचाहार) से भी हिस्सा मिलता है।

  • जल विद्युत: माही बजाज सागर, राणा प्रताप सागर, जवाई बांध आदि। केंद्रीय परियोजनाओं (भाखड़ा, व्यास, चंबल, सतपुड़ा, टनकपुर, सलाल, उरी) से आवंटन।

  • गैस आधारित: धौलपुर गैस संयंत्र।

  • परमाणु ऊर्जा: केंद्रीय परियोजनाओं (जैसे राजस्थान परमाणु ऊर्जा संयंत्र) से आवंटित हिस्सा।

गैर-परंपरागत/नवीकरणीय स्रोत (एन.आर.ई.):

  • पवन ऊर्जा: राजस्थान इस क्षेत्र में अग्रणी। जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर में पवन फार्म।

  • सौर ऊर्जा: राज्य का सबसे तेजी से विकसित होता क्षेत्र। थार मरुस्थल में विशाल सौर पार्क (भदला, फतेहगढ़)। 2015-16 से 2019-20 के बीच क्षमता में तीन गुना से अधिक वृद्धि।

  • बायोमास/बायोगैस: कृषि अवशेष, गोबर आदि से ऊर्जा उत्पादन। क्षमता स्थिर है।


भविष्य की दिशा एवं महत्व

राज्य की ऊर्जा नीति का फोकस अब नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा पर है। थार मरुस्थल का विशाल, बंजर और धूप से भरपूर क्षेत्र इसे एक आदर्श स्थान बनाता है। सरकार का लक्ष्य राज्य को एक “रिन्यूएबल एनर्जी हब” के रूप में विकसित करना है, जो ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. राजस्थान में सबसे अधिक बिजली किस स्रोत से पैदा की जाती है?
तापीय ऊर्जा (कोयला/गैस आधारित) राजस्थान में बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत है। यह राज्य की अधिष्ठापित क्षमता का लगभग आधा हिस्सा (लगभग 8,000-9,000 मेगावाट) है।

2. राजस्थान को ‘सौर ऊर्जा का हब’ क्यों कहा जाता है?
राजस्थान, विशेषकर थार मरुस्थल, देश के सबसे उच्च सौर विकिरण (Solar Insolation) वाले क्षेत्रों में आता है। यहाँ वर्ष में लगभग 300 दिन धूप खिली रहती है और विशाल बंजर भूमि उपलब्ध है, जो बड़े सौर पार्कों के लिए आदर्श है। भदला और फतेहगढ़ जैसे दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्क यहीं स्थित हैं।

3. राजस्थान में पवन ऊर्जा के लिए कौन-से क्षेत्र उपयुक्त हैं?
राजस्थान के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी जिले पवन ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त हैं। जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर और जालौर में व्यापक पवन फार्म स्थापित हैं। यहाँ वर्ष भर तेज हवाएँ चलती हैं।

4. ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों के क्या लाभ हैं?
गैर-परंपरागत (नवीकरणीय) स्रोतों के प्रमुख लाभ हैं: नवीकरणीय (असीमित), पर्यावरण के अनुकूल (कम प्रदूषण), दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, और विकेंद्रीकृत ऊर्जा आपूर्ति की संभावना। ये ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में बिजली पहुँचाने में विशेष रूप से उपयोगी हैं।

5. राजस्थान में बायोमास ऊर्जा की क्या संभावना है?
राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य होने के साथ-साथ देश में सबसे अधिक पशुधन रखने वाला राज्य है। इसलिए कृषि अवशेष (पराली, भूसा) और पशु अपशिष्ट (गोबर) की प्रचुर उपलब्धता है। इनका उपयोग बायोमास प्लांट्स और बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है, जो कचरे का निपटान भी करेगा और ग्रामीण रोजगार भी पैदा करेगा।

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