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राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि एवं सहायक क्षेत्रों की भूमिका आधारभूत और महत्वपूर्ण है। राज्य की अधिकांश जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी क्षेत्र पर निर्भर है। यह क्षेत्र प्राथमिक रूप से फसल उत्पादन, पशुधन, वानिकी एवं मत्स्य पालन गतिविधियों को समेटे हुए है। हालांकि कृषि मूलतः अनिश्चित मानसून पर निर्भर है और भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, फिर भी यह क्षेत्र सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSVA) में एक प्रमुख योगदानकर्ता बना हुआ है।
अर्थव्यवस्था में योगदान: संख्याओं में
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का आर्थिक प्रदर्शन लगातार मजबूत हो रहा है:
स्थिर मूल्यों (2011-12) पर: जीएसवीए वर्ष 2014-15 में 1.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 1.68 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 4.16% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) दर्शाता है।
प्रचलित मूल्यों पर: जीएसवीए वर्ष 2014-15 में 1.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 2.47 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 10.06% की उल्लेखनीय वार्षिक वृद्धि दर है।
विकास दर: 2019-20 में इस क्षेत्र की विकास दर पिछले वर्ष (2018-19) की तुलना में 5.65% रही, जो 2015-16 के 0.33% से एक महत्वपूर्ण उछाल है।
राज्य की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी:
राजस्थान के कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान प्रचलित कीमतों पर वर्ष 2011-12 में 28.56% था, जो 2019-20 में 25.56% रह गया। यह गिरावट सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों के तेजी से विकसित होने के कारण है, फिर भी कृषि एक चौथाई से अधिक अर्थव्यवस्था का आधार बनी हुई है।
उप-क्षेत्रों की संरचना (2019-20 के अनुसार):
फसल क्षेत्र: 47.54% (सबसे बड़ा हिस्सा)
पशुधन क्षेत्र: 41.54% (लगभग बराबर का महत्वपूर्ण योगदान)
वानिकी एवं लॉगिंग: 10.55%
मत्स्य क्षेत्र: 0.37%
इससे स्पष्ट है कि राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में फसलों और पशुपालन का द्वैत आधार है।
जोत धारक एवं भूमि जोत का आकार: एक बदलता परिदृश्य
कृषि गणना 2015-16 के अनुसार:
राज्य में कुल 76.55 लाख प्रचालित भूमि जोतें हैं (2010-11 में यह संख्या 68.88 लाख थी)।
जोतों का कुल क्षेत्रफल 2010-11 के 211.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 2015-16 में 208.73 लाख हेक्टेयर हो गया, जो 1.24% की कमी है।
जोतों का आकार के अनुसार वर्गीकरण (2015-16):
सीमांत जोत: 40.12% (सबसे अधिक संख्या)
लघु जोत: 21.90%
अर्द्ध-मध्यम जोत: 18.50%
मध्यम जोत: 14.79%
बड़ी जोत: 4.69%
प्रवृत्ति: 2010-11 की तुलना में 2015-16 में सीमांत, लघु व अर्द्ध-मध्यम आकार की जोतों की संख्या और क्षेत्रफल दोनों में वृद्धि हुई है, जबकि बड़ी जोतों की संख्या और क्षेत्रफल में कमी आई है। यह संयुक्त परिवारों के विघटन और भूमि के बंटवारे की ओर संकेत करता है, जिससे औसत जोत का आकार घट रहा है।
मुख्य चुनौतियाँ:
जलवायविक निर्भरता: अनिश्चित एवं अपर्याप्त वर्षा पर निर्भरता।
जल संकट: भूजल स्तर का तेजी से गिरना और सिंचाई सुविधाओं का अभाव।
छोटी और बिखरी जोतें: उत्पादकता और यंत्रीकरण में बाधक।
मृदा स्वास्थ्य: मरुस्थलीकरण, लवणीकरण और मिट्टी की उर्वरता में कमी।
पशुपालन: राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
राजस्थान पशुधन की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।
यह क्षेत्र कृषि जीएसवीए में 41.54% का योगदान देता है।
यह ग्रामीण परिवारों, विशेषकर भूमिहीन श्रमिकों और छोटे किसानों के लिए आय और रोजगार का एक स्थिर स्रोत है।
प्रमुख पशुधन: गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊँट तथा मुर्गीपालन।
उत्पाद: दूध, मांस, ऊन, चमड़ा और खाद। राजस्थान ऊन उत्पादन में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
सरकार द्वारा गो-वंश संवर्धन, नस्ल सुधार, डेयरी विकास और पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दिया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राजस्थान की कृषि मुख्य रूप से किस पर निर्भर है?
राजस्थान की कृषि मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर है, जो अनिश्चित और कम है। केवल लगभग एक-तिहाई कृषि भूमि ही सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत आती है।
2. राजस्थान में सबसे अधिक संख्या में किस आकार की कृषि जोतें पाई जाती हैं?
राजस्थान में सबसे अधिक संख्या सीमांत जोतों (1 हेक्टेयर से कम) की है, जो कुल जोतों का 40.12% हैं। इसके बाद लघु जोतों (1-2 हेक्टेयर) का स्थान है।
3. कृषि क्षेत्र के बाद राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किस क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है?
कृषि (फसल) क्षेत्र के बाद पशुधन क्षेत्र का राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान है। यह कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के जीएसवीए में 41.54% हिस्सेदारी रखता है।
4. क्या राजस्थान में कृषि जोतों का औसत आकार बढ़ रहा है या घट रहा है?
औसत जोत का आकार घट रहा है। बड़ी जोतों की संख्या और क्षेत्रफल कम हो रहा है, जबकि सीमांत और लघु जोतों की संख्या बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण भूमि का बंटवारा और जनसंख्या दबाव है।
5. राजस्थान पशुपालन के किस उत्पाद में विशेष स्थान रखता है?
राजस्थान ऊन उत्पादन में देश में एक अग्रणी राज्य है। यहाँ की मगरा, चोकला, पुगल जैसी भेड़ की नस्लें उच्च गुणवत्ता वाली ऊन के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, यह एक प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्य भी है।