रामदेवजी: राजस्थान के लोकदेवता एवं कामड़िया संप्रदाय के संस्थापक

(विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)

जन्म एवं परिवार

  • जन्मस्थान: उडूकाश्मीर (बाड़मेर जिला)

  • वंश: तंवर (तोमर) राजपूत

    • पिता: अजमाल जी (पोकरण के सामंत)

    • माता: मैणादे

    • पत्नी: नेतलदे (अमरकोट के दलेलसिंह सोढ़ा की पुत्री)

  • गुरु: बालीनाथ जी (मसूरिया पहाड़ी, जोधपुर)

प्रमुख प्रतीक एवं शिक्षाएँ

  • वाहन: लीलो घोड़ा

  • झंडा: नेजा (लाल रंग का)

  • जागरण: जमो (रात्रि भजन)

  • ग्रंथ: चौबीस बाणियाँ (आध्यात्मिक उपदेश)

  • भक्त: रिखिया (मेघवाल समुदाय)

धार्मिक महत्व

  1. अवतार: विष्णु का अवतार माने जाते हैं।

  2. पीरों का पीर: हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक।

  3. सामाजिक सुधार:

    • भैरव नामक साहूकार को पोकरण से निष्कासित किया।

    • छुआछूत का विरोध किया।

  4. कामड़िया संप्रदाय:

    • स्थापना की, जहाँ महिलाएँ तेरहताली नृत्य करती हैं।

    • पगल्ये (पैरों के निशान) की पूजा की जाती है।

मृत्यु एवं समाधि

  • समाधि तिथि: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (रुणीचा, जैसलमेर)

  • डाली बाई: मेघवाल भक्त ने भाद्रपद शुक्ल दशमी को समाधि ली।

    • इन्हें रामदेवजी की धर्म बहन कहा जाता है।

प्रमुख मंदिर एवं तीर्थ

स्थान जिला विशेषता
रुणीचा (रामदेवरा) जैसलमेर मुख्य मंदिर, वार्षिक मेला
पोकरण जैसलमेर जन्मस्थान के निकट
मसूरिया पहाड़ी जोधपुर गुरु बालीनाथ का स्थान
बिरांटिया खुर्द ब्यावर ऐतिहासिक मंदिर
हल्दिना अलवर लोकदेवता के रूप में पूजा
छोटा रामदेवरा गुजरात राजस्थान से बाहर प्रसिद्ध मंदिर
परचा बावड़ी रामदेवरा चमत्कारिक जल स्रोत (“परचा” = चमत्कार)

सांस्कृतिक प्रभाव

  • मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक रामदेवरा मेला (मारवाड़ का कुंभ)।

  • कला:

    • तेरहताली नृत्य (कामड़िया महिलाओं द्वारा)।

    • पगल्ये की पूजा: मंदिर में चांदी के पैरों के निशान।

  • लोकगाथाएँ: “रामदेवजी री वचनिका” में उनके चमत्कारों का वर्णन।

राजस्थान में विरासत

  • जाति-समरसता: मेघवाल, दलित और राजपूत समुदाय द्वारा समान रूप से पूजा।

  • अंतर्राष्ट्रीय पहचान: गुजरात और सिंध (पाकिस्तान) तक भक्ति प्रसार।

रामदेवजी: सामाजिक न्याय और भक्ति के अग्रदूत! 

“धरती धोरा री, रामापीर रा नाम!” 

(राजस्थानी कहावत: रामदेवजी की ख्याति धरती जितनी विशाल है)।

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