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राजस्थान की धरती पर फले-फूले एक ऐसे महत्वपूर्ण भक्ति सम्प्रदाय के बारे में जिसने राम भक्ति की निर्गुण धारा को समृद्ध किया – रामस्नेही सम्प्रदाय। यह सम्प्रदाय अपनी विभिन्न शाखाओं के माध्यम से भक्ति की अलख जगाए हुए है।
प्रमुख धार्मिक सम्प्रदाय
रामस्नेही सम्प्रदाय 18वीं शताब्दी में राजस्थान में उत्पन्न एक प्रमुख निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय है जो रामानंद की शिष्य परंपरा से निकला है। यह सम्प्रदाय मुख्य रूप से राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी चार शाखाओं के माध्यम से फैला हुआ है और निर्गुण राम भक्ति पर बल देता है।
शाहपुरा शाखा
प्रवर्तक: रामचरण जी (जन्म-1719 ई.)
दर्शन: निर्गुण
मुख्य केंद्र: शाहपुरा (भीलवाड़ा)
साहित्य: अभवानी (ब्रज भाषा में)
विशेष तथ्य:
रामस्नेही संप्रदाय रामानंद की शिष्य परंपरा से निकला है
सोडा ग्राम-टॉक इसकी एक महत्वपूर्ण गतिविधि है
शाहपुरा गद्दी में चैत्र कृष्ण-1 से 5 तक फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है
रैण शाखा (दरिया पंथ)
प्रवर्तक: संत दरियाव जी (जन्म-1676 ई., जैतारण)
दर्शन: निर्गुण
मुख्य केंद्र: मेड़ता (नागौर)
विशेष तथ्य:
संत दरियावजी ने हिन्दु-मुस्लिम एकता एवं नारी सम्मान पर बल दिया
रामस्नेही संप्रदाय के प्रार्थना स्थल ‘रामद्वारा’ कहलाते हैं
सिंहथल शाखा
प्रवर्तक: संत हरिरामदास जी
दर्शन: निर्गुण
मुख्य केंद्र: सिंहथल (बीकानेर)
साहित्य:
हरिरामदास जी की परची
हरिरामदास कृत-‘निसाणी’
खेड़ापा शाखा
प्रवर्तक: संत रामदास जी (जन्म 1726 ई.)
दर्शन: निर्गुण
मुख्य केंद्र: खेड़ापा (जोधपुर), बीकमकोर (जोधपुर)
साहित्य:
संत रामदास जी कृत- गुरु महिमा, जम फारगनी, अंगबद्ध अनुभव वाणी
दयालदास जी कृत-करुणा सागर
सम्प्रदाय की सामान्य विशेषताएं
रामस्नेही सम्प्रदाय की कुछ सामान्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
निर्गुण भक्ति: सभी शाखाएं निर्गुण राम भक्ति में विश्वास रखती हैं
रामद्वारा: संप्रदाय के प्रार्थना स्थल ‘रामद्वारा’ कहलाते हैं
सामाजिक समरसता: विशेषकर दरिया पंथ में हिन्दु-मुस्लिम एकता पर बल
नारी सम्मान: संत दरियावजी द्वारा नारी सम्मान पर विशेष जोर
साहित्यिक परंपरा: सभी शाखाओं की समृद्ध साहित्यिक विरासत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. रामस्नेही सम्प्रदाय की कितनी शाखाएँ हैं और कौन-कौन सी हैं?
रामस्नेही सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ हैं:
शाहपुरा शाखा
रैण शाखा (दरिया पंथ)
सिंहथल शाखा
खेड़ापा शाखा
2. रामस्नेही सम्प्रदाय किसकी शिष्य परंपरा से निकला है?
रामस्नेही संप्रदाय रामानंद की शिष्य परंपरा से निकला है।
3. रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रार्थना स्थल को क्या कहा जाता है?
रामस्नेही संप्रदाय के प्रार्थना स्थल ‘रामद्वारा’ कहलाते हैं।
4. किस संत ने हिन्दु-मुस्लिम एकता और नारी सम्मान पर विशेष बल दिया?
संत दरियावजी ने हिन्दु-मुस्लिम एकता एवं नारी सम्मान पर विशेष बल दिया।
5. शाहपुरा शाखा में कौन-सा महोत्सव मनाया जाता है?
शाहपुरा गद्दी में चैत्र कृष्ण-1 से 5 तक फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है।
6. सभी शाखाएँ किस प्रकार की भक्ति में विश्वास रखती हैं?
सभी चारों शाखाएँ निर्गुण भक्ति में विश्वास रखती हैं।
निष्कर्ष
रामस्नेही सम्प्रदाय राजस्थान की धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसने निर्गुण राम भक्ति की धारा को समृद्ध किया है। अपनी चार शाखाओं के माध्यम से यह सम्प्रदाय सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता और नारी सम्मान का संदेश फैला रहा है। संत रामचरण जी, संत दरियाव जी, संत हरिरामदास जी और संत रामदास जी जैसे महान संतों ने इस सम्प्रदाय की नींव रखी और इसे एक समृद्ध साहित्यिक विरासत प्रदान की। आज भी यह सम्प्रदाय अपने अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का कार्य कर रहा है और राम भक्ति की अलख जगाए हुए है।