हरिराम जी: सर्परक्षक लोकदेवता

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(विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)

मूल जानकारी

  • मंदिर स्थल: झोरड़ा (नागौर जिला)

  • प्रमुख मेला: भाद्रपद शुक्ल पंचमी

  • उपासना का केंद्र: सर्पों से सुरक्षा हेतु

धार्मिक विशेषताएँ

  1. सर्परक्षक देवता:

    • सांपों के काटने से बचाव हेतु पूजे जाते हैं।

    • मंदिर में सांप की बांबी (बिल) की पूजा की जाती है।

  2. पूजा विधि:

    • नीले रंग के धागे (हरिराम धागा) का प्रयोग।

    • दूध-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा।

मेले की विशेषताएँ

  • भाद्रपद पंचमी पर विशाल जनसमूह:

    • सांपों से संबंधित समस्याओं का निवारण हेतु आस्था।

    • भोपों द्वारा सर्प-कथाओं का गायन।

सांस्कृतिक प्रभाव

  • स्थापत्य: झोरड़ा मंदिर में लोककला के दर्शन।

  • लोकविश्वास:

    • हरिरामजी को “फणीश्वर” (सर्पों के स्वामी) की उपाधि।

तुलनात्मक विश्लेषण

देवता मंदिर स्थल विशेष योगदान
हरिरामजी झोरड़ा (नागौर) सर्पबाधा निवारण
गोगाजी गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) सर्परक्षक
तेजाजी परबतसर (नागौर) सर्प/गौरक्षक

हरिरामजी: विषहरण और लोकआस्था के अद्भुत संगम! 

“हरिराम री डोर, सांप न छोड़े कोर!”

(राजस्थानी कहावत: हरिरामजी का धागा सांपों को दूर रखता है)।

विशेष टिप्पणी: झोरड़ा मंदिर में नागपंचमी के अवसर पर विशेष पूजा होती है, जहाँ सांपों को दूध पिलाने की परंपरा है।

 
 
 
 
 
 
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