नाथ संप्रदाय

भारत के एक प्राचीन और रहस्यमयी सम्प्रदाय के बारे में जिसने योग और साधना की परंपरा को सुरक्षित रखा – नाथ संप्रदाय। यह सम्प्रदाय अपनी योग साधना और सिद्धियों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

प्रमुख धार्मिक सम्प्रदाय

नाथ संप्रदाय भारत का एक प्राचीन शैव सम्प्रदाय है जिसकी स्थापना मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। यह सम्प्रदाय मुख्य रूप से हठयोग और राजयोग की साधना पर बल देता है। नाथ संप्रदाय शिव को आदिनाथ मानता है और उन्हें अपना आदि गुरु मानता है। यह सम्प्रदाय राजस्थान सहित पूरे भारत में फैला हुआ है।

सम्प्रदाय

नाथ संप्रदाय एक ऐसा साधना मार्ग है जो योग और तंत्र की समन्वित परंपरा में विश्वास रखता है। इस सम्प्रदाय में गुरु-शिष्य परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है और साधक गुरु के मार्गदर्शन में साधना करते हैं। नाथ योगियों को कानफड़े, डिगम्बर, योगी आदि नामों से भी जाना जाता है।

प्रवर्तक

इस महान सम्प्रदाय के संस्थापक मत्स्येन्द्रनाथ हैं। मत्स्येन्द्रनाथ को नाथ परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है और उनके शिष्य गोरखनाथ ने इस परंपरा को विस्तार दिया। मत्स्येन्द्रनाथ ने हठयोग और तंत्र साधना की विधियों का प्रसार किया।

सगुण /निर्गुण

नाथ संप्रदाय सगुण भक्ति में विश्वास रखता है। नाथ संप्रदाय शिव को आदिनाथ मानता है और भगवान शिव के सगुण रूप की उपासना पर बल देता है। इस सम्प्रदाय के साधक शिव को आदि योगी और आदि गुरु के रूप में पूजते हैं।

प्रमुख पीठ/मंदिर

नाथ संप्रदाय का प्रमुख पीठ महामंदिर (जोधपुर) में स्थित है। जोधपुर के महामंदिर का निर्माण जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह ने 1872 ई. में किया था। यह मंदिर नाथ संप्रदाय का राजस्थान में प्रमुख केंद्र है।

रचनाएँ प्रमुख ग्रंथ

नाथ संप्रदाय की समृद्ध साहित्यिक परंपरा है:

महाराजा मानसिंह कृत:

  • नाथ चरित

  • जलंधर चरित

  • अनुभव मंजरी

  • सरुपण रा दूहा

पृथ्वीनाथ कृत:

  • निरंजन निरवान

  • भक्ति बैकुण्ठ

विशिष्ट तथ्य

नाथ संप्रदाय की कुछ विशेष बातें इस प्रकार हैं:

राजस्थान में शाखाएँ:
राजस्थान में नाथ संप्रदाय की दो शाखाएँ हैं:

  • (i) बैराग पंथ – राताडूंगा (नागौर)

  • (ii) माननाथी पंथ – महामंदिर (जोधपुर)

कानपा पंथ:
कानपा पंथ योगी जालंधरनाथ के शिष्य कानपानाथ ने इस पंथ का प्रवर्तन किया। यह नाथ संप्रदाय की एक महत्वपूर्ण शाखा है।

महामंदिर का निर्माण:
जोधपुर के महामंदिर का निर्माण जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह ने 1872 ई. में किया था। यह मंदिर नाथ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र बना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. नाथ संप्रदाय के संस्थापक कौन हैं?
नाथ संप्रदाय के संस्थापक मत्स्येन्द्रनाथ हैं।

2. नाथ संप्रदाय किसकी उपासना करता है?
नाथ संप्रदाय शिव को आदिनाथ मानता है और उनकी उपासना करता है।

3. राजस्थान में नाथ संप्रदाय की कितनी शाखाएँ हैं?
राजस्थान में नाथ संप्रदाय की दो शाखाएँ हैं:

  • बैराग पंथ – राताडूंगा (नागौर)

  • माननाथी पंथ – महामंदिर (जोधपुर)

4. जोधपुर के महामंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया?
जोधपुर के महामंदिर का निर्माण जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह ने 1872 ई. में किया था

5. कानपा पंथ के प्रवर्तक कौन हैं?
कानपा पंथ योगी जालंधरनाथ के शिष्य कानपानाथ ने इस पंथ का प्रवर्तन किया

6. महाराजा मानसिंह की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
महाराजा मानसिंह की प्रमुख रचनाओं में नाथ चरित, जलंधर चरित, अनुभव मंजरी, सरुपण रा दूहा शामिल हैं।

निष्कर्ष

नाथ संप्रदाय भारतीय योग और साधना परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसने योग और तंत्र की समन्वित परंपरा को सुरक्षित रखा। मत्स्येन्द्रनाथ और गोरखनाथ जैसे महान सिद्धों ने इस परंपरा की नींव रखी। राजस्थान में यह सम्प्रदाय बैराग पंथ और माननाथी पंथ के रूप में फला-फूला। जोधपुर के महामंदिर ने इस सम्प्रदाय के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाराजा मानसिंह ने न केवल मंदिर का निर्माण करवाया बल्कि साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से भी इस परंपरा को समृद्ध किया। नाथ संप्रदाय की यह अनूठी साधना परंपरा आज भी हज़ारों साधकों के लिए मार्गदर्शक का कार्य कर रही है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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