राजस्थान की वन्य जीव एवं जैव विविधता: रेगिस्तान का जीवंत संसार

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भारत की विशाल भौगोलिक विविधता इसे विश्व के 17 मेगा जैव विविधता संपन्न देशों में शामिल करती है। राजस्थान इस जैविक संपदा का एक अनूठा अध्याय है। यहाँ अरावली की हरी पहाड़ियों से लेकर थार के विशाल रेतीले मरुस्थल तक, विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र विद्यमान हैं, जिन्होंने असंख्य वन्य जीव-जंतुओं को आश्रय दिया है। “वन्य जीव” से तात्पर्य उन सभी प्राणियों से है जो प्राकृतिक रूप से जंगलों, मरुस्थलों, जलाशयों में रहते हैं और मानव नियंत्रण से मुक्त हैं।


राजस्थान की वन्य जीव संपदा: एक विहंगम दृश्य

1. माँसाहारी पशु (Carnivores)

राजस्थान में माँसाहारी जीवों की समृद्ध विरासत है। प्रमुख जीव हैं:

  • बाघ: अलवर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान इसके प्रमुख आवास हैं।

  • तेंदुआ: भरतपुर, अलवर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, जालौर तथा माउंट आबू क्षेत्र।

  • अन्य: सियार, लोमड़ी, जंगली कुत्ता, जरख, रेगिस्तानी बिल्ली, नेवला व बिज्जू आदि भी पाए जाते हैं।

2. शाकाहारी पशु (Herbivores)

राजस्थान के वन व मैदान इन जीवों से गुलजार हैं:

  • काला हिरण (ब्लैकबक): राजस्थान का राज्य पशु। भरतपुर, जयपुर, सिरोही, बाड़मेर, अजमेर व कोटा में पाया जाता है।

  • चिंकारा: सुंदर मरुस्थलीय हिरण। भरतपुर, सवाई माधोपुर, जालौर, जोधपुर व सिरोही में।

  • नीलगाय: देश की सबसे बड़ी चौपाया। किशनगढ़, भरतपुर, करौली, जोधपुर व झालावाड़ में।

  • साँभर व चीतल: भरतपुर, अलवर, उदयपुर, सवाई माधोपुर व बाँसवाड़ा के वनों में।

  • अन्य: जंगली सूअर, भालू, लंगूर, बंदर आदि।

3. सरीसृप (Reptiles)

राजस्थान की नदियों, झीलों और रेतीले इलाकों में सरीसृपों की विविध प्रजातियाँ मिलती हैं:

  • मगरमच्छ: भरतपुर के कीलादेव राष्ट्रीय उद्यान व चम्बल नदी अभयारण्य में।

  • घड़ियाल: चम्बल नदी अभयारण्य में संरक्षित।

  • साँप: अजगर, कोबरा, करैत, सांडा व वाइपर आदि।

4. पक्षी (Birds)

राजस्थान पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग है:

  • गोडावण (Great Indian Bustard): राजस्थान का राज्य पक्षी। दुर्लभ व संकटग्रस्त प्रजाति। बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर के मरुस्थल में पाया जाता है।

  • देशी पक्षी: मोर (राष्ट्रीय पक्षी), नीलकंठ, तीतर, काला तीतर, चील, गिद्ध आदि।

  • प्रवासी पक्षी:

    • भरतपुर का घना पक्षी विहार (कीलादेव राष्ट्रीय उद्यान): यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। शीतकाल में साइबेरियन सारस सहित हज़ारों प्रवासी पक्षी आते हैं। इसे “पक्षियों का स्वर्ग” कहा जाता है।

    • खींचन (फलौदी, जोधपुर): कुरजाँ पक्षियों के प्रवास के लिए प्रसिद्ध।


वन्य जीव संरक्षण: आवश्यकता एवं प्रयास

वन्य जीव संख्या में निरंतर हो रही कमी एक वैश्विक चिंता का विषय है, और राजस्थान इससे अछूता नहीं है। गोडावण व चीता जैसी प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं।

मुख्य खतरे:

  1. आवास विनाश: शहरीकरण, वनों की कटाई, मरुस्थलीकरण व कृषि विस्तार।

  2. जलवायु परिवर्तन: सूखा, गर्मी की लहरें, जल स्रोतों का सूखना।

  3. मानव-वन्यजीव संघर्ष: बढ़ते इलाकों में टकराव।

  4. अवैध शिकार व तस्करी: आर्थिक लाभ के लिए जानवरों व उनके अंगों का व्यापार।

संरक्षण के उपाय:

  • संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क: राजस्थान में 5 टाइगर रिजर्व (रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी, दर्रा), 28 वन्यजीव अभयारण्य व 11 राष्ट्रीय उद्यान स्थापित।

  • प्रोजेक्ट टाइगर व एलीफैंट: बाघ व हाथी संरक्षण हेतु केंद्र प्रायोजित परियोजनाएँ।

  • कानूनी ढाँचा: भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का कड़ाई से पालन।

  • सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया से जोड़ना।

  • जागरूकता अभियान: पर्यावरण शिक्षा व ecotourism को बढ़ावा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. राजस्थान का राज्य पशु और राज्य पक्षी कौन-सा है?

  • राज्य पशु: चिंकारा व काला हिरण (दोनों मान्य)। हालाँकि, काला हिरण आधिकारिक रूप से अधिक प्रचलित है।

  • राज्य पक्षी: गोडावण (Great Indian Bustard)।

2. राजस्थान में बाघ किस राष्ट्रीय उद्यान में देखे जा सकते हैं?
राजस्थान में बाघ मुख्य रूप से रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर) और सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर) में देखे जा सकते हैं। हाल ही में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा) को भी शामिल किया गया है।

3. गोडावण पक्षी के संरक्षण की क्या स्थिति है?
गोडावण एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) प्रजाति है। इसके प्राकृतिक आवास (घास के मैदान) के सिकुड़ने और शिकार के कारण इसकी संख्या नाटकीय रूप से कम हुई है। राजस्थान सरकार ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ चला रही है तथा जैसलमेर में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है।

4. पक्षी प्रेमियों के लिए राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध स्थान कौन-सा है?
भरतपुर स्थित केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) पक्षी प्रेमियों के लिए विश्व प्रसिद्ध स्थान है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल भी है, जहाँ हर साल सर्दियों में हजारों दुर्लभ प्रवासी पक्षी आते हैं।

5. चम्बल नदी किस दुर्लभ जीव के लिए प्रसिद्ध है?
चम्बल नदी अपने घड़ियाल (Gharial) अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी घड़ियाल आबादी में से एक पाई जाती है। इसके अलावा यहाँ लालसिर वाले कछुए (Red-crowned Roofed Turtle) और गंगा की डॉलफिन भी पाई जाती हैं।

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