ईसाई त्योहारों का विस्तृत विवरण

(ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार)

. क्रिसमस (25 दिसंबर)

  • महत्व:

    • ईसा मसीह (यीशु) का जन्मदिन

    • “प्रभु का प्रकाश पर्व” (Feast of Nativity)

  • परंपराएँ:

    • क्रिसमस ट्री सजाना

    • मध्यरात्रि मास (चर्च सेवा)

    • उपहारों का आदान-प्रदान

  • राजस्थान में:

    • जयपुर, अजमेर और उदयपुर के चर्चों में विशेष सजावट

 नववर्ष (1 जनवरी)

  • धार्मिक महत्व:

    • ईसा मसीह को 4 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्ति (प्रबोधन)

    • ईसाई धर्म के औपचारिक प्रारंभ का प्रतीक

  • उत्सव:

    • चर्चों में विशेष प्रार्थना सभा

    • आतिशबाजी और समारोह

गुड फ्राइडे (मार्च/अप्रैल)

  • महत्व:

    • ईसा मसीह की क्रूस पर बलिदान (फाँसी) की याद

    • ईस्टर से ठीक पहले वाला शुक्रवार

  • परंपराएँ:

    • उपवास और प्रार्थना

    • चर्चों में क्रॉस की पूजा

    • शोक का दिन (कोई संगीत/उत्सव नहीं)

ईस्टर रविवार (मार्च/अप्रैल)

  • महत्व:

    • ईसा मसीह का पुनर्जन्म (Resurrection)

    • ईसाई धर्म का सबसे पवित्र दिन

  • परंपराएँ:

    • ईस्टर अंडे (जीवन का प्रतीक)

    • “ईस्टर बनी” (खरगोश) की कहानियाँ

    • चर्चों में विशेष सेवा

स्वर्गारोहण दिवस (Ascension Day)

  • महत्व:

    • ईसा मसीह का 40 दिन बाद स्वर्ग जाना

    • ईस्टर के बाद 40वें दिन (गुरुवार को)

  • परंपराएँ:

    • चर्चों में विशेष प्रार्थना

राजस्थान में ईसाई समुदाय

  • प्रमुख चर्च:

    • जयपुर का “सेंट टेरेसा चर्च”

    • अजमेर का “सेंट मैरी कैथेड्रल”

  • विशेष आयोजन:

    • क्रिसमस पर कैरोल गायन

    • गुड फ्राइडे पर क्रॉस यात्रा

विशेष तथ्य

  • ग्रेगोरियन कैलेंडर (1582 में पोप ग्रेगोरी XIII द्वारा सुधारित)

  • ईस्टर की तिथि: पहले पूर्णिमा के बाद वाला रविवार (मार्च-अप्रैल)

  • क्रिसमस ट्री: जर्मनी से शुरू हुई परंपरा

ईसाई पर्व: प्रेम, बलिदान और नई शुरुआत का संदेश! 

                                                                   “ईश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।”

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