(विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)
जन्म एवं परिवार
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जन्मस्थान: उडूकाश्मीर (बाड़मेर जिला)
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वंश: तंवर (तोमर) राजपूत
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पिता: अजमाल जी (पोकरण के सामंत)
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माता: मैणादे
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पत्नी: नेतलदे (अमरकोट के दलेलसिंह सोढ़ा की पुत्री)
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गुरु: बालीनाथ जी (मसूरिया पहाड़ी, जोधपुर)
प्रमुख प्रतीक एवं शिक्षाएँ
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वाहन: लीलो घोड़ा
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झंडा: नेजा (लाल रंग का)
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जागरण: जमो (रात्रि भजन)
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ग्रंथ: चौबीस बाणियाँ (आध्यात्मिक उपदेश)
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भक्त: रिखिया (मेघवाल समुदाय)
धार्मिक महत्व
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अवतार: विष्णु का अवतार माने जाते हैं।
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पीरों का पीर: हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक।
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सामाजिक सुधार:
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भैरव नामक साहूकार को पोकरण से निष्कासित किया।
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छुआछूत का विरोध किया।
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कामड़िया संप्रदाय:
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स्थापना की, जहाँ महिलाएँ तेरहताली नृत्य करती हैं।
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पगल्ये (पैरों के निशान) की पूजा की जाती है।
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मृत्यु एवं समाधि
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समाधि तिथि: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (रुणीचा, जैसलमेर)
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डाली बाई: मेघवाल भक्त ने भाद्रपद शुक्ल दशमी को समाधि ली।
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इन्हें रामदेवजी की धर्म बहन कहा जाता है।
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प्रमुख मंदिर एवं तीर्थ
| स्थान | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| रुणीचा (रामदेवरा) | जैसलमेर | मुख्य मंदिर, वार्षिक मेला |
| पोकरण | जैसलमेर | जन्मस्थान के निकट |
| मसूरिया पहाड़ी | जोधपुर | गुरु बालीनाथ का स्थान |
| बिरांटिया खुर्द | ब्यावर | ऐतिहासिक मंदिर |
| हल्दिना | अलवर | लोकदेवता के रूप में पूजा |
| छोटा रामदेवरा | गुजरात | राजस्थान से बाहर प्रसिद्ध मंदिर |
| परचा बावड़ी | रामदेवरा | चमत्कारिक जल स्रोत (“परचा” = चमत्कार) |
सांस्कृतिक प्रभाव
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मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक रामदेवरा मेला (मारवाड़ का कुंभ)।
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कला:
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तेरहताली नृत्य (कामड़िया महिलाओं द्वारा)।
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पगल्ये की पूजा: मंदिर में चांदी के पैरों के निशान।
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लोकगाथाएँ: “रामदेवजी री वचनिका” में उनके चमत्कारों का वर्णन।
राजस्थान में विरासत
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जाति-समरसता: मेघवाल, दलित और राजपूत समुदाय द्वारा समान रूप से पूजा।
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अंतर्राष्ट्रीय पहचान: गुजरात और सिंध (पाकिस्तान) तक भक्ति प्रसार।
रामदेवजी: सामाजिक न्याय और भक्ति के अग्रदूत!
“धरती धोरा री, रामापीर रा नाम!”
(राजस्थानी कहावत: रामदेवजी की ख्याति धरती जितनी विशाल है)।