तेजाजी: राजस्थान के सर्परक्षक लोकदेवता

(पूर्ण जीवन परिचय एवं सांस्कृतिक प्रभाव)

जन्म एवं परिवार

  • जन्मस्थान: खरनाल (नागौर जिला)

  • वंश: जाट समुदाय

    • पिता: ताहड़जी (तारुड़जी)

    • माता: रामकुंवरी

    • पत्नी: पेमलदे (पनेर, अजमेर)

    • बहन: राजल बाई (बूंगरी माता)

  • घोड़ी: लीलण (इनके नाम पर “लीलण एक्सप्रेस” रेलगाड़ी चलती है)

वीरगति की कथा

  1. गौरक्षक: लाछा नामक गुर्जर महिला की गायों को बचाते हुए घायल हुए।

  2. मृत्यु: सुरसुरा गाँव (अजमेर) में सांप के काटने से देहांत।

    • मान्यता: मृत्यु से पहले सांप को “दर्शन मात्र से विषहीन” होने का वरदान दिया।

धार्मिक महत्व

  • उपनाम:

    • “काला-बाला का देवता” (काले बैल और गायों के रक्षक)

    • “सर्परक्षक देवता” (सांप काटने पर तेजाजी का धागा बाँधा जाता है)

  • कृषि संस्कृति:

    • खेतों में हल चलाते समय तेजाजी के गीत गाए जाते हैं।

प्रमुख मंदिर

स्थान जिला विशेषता
परबतसर डीडवाना (नागौर) जोधपुर महाराजा अभय सिंह द्वारा निर्मित
खरनाल नागौर जन्मस्थान, राजल बाई का मंदिर
सुरसुरा अजमेर मृत्यु स्थल
बासी दुगारी बूंदी ऐतिहासिक मंदिर

प्रमुख मंदिर

स्थान जिला विशेषता
परबतसर डीडवाना (नागौर) जोधपुर महाराजा अभय सिंह द्वारा निर्मित
खरनाल नागौर जन्मस्थान, राजल बाई का मंदिर
सुरसुरा अजमेर मृत्यु स्थल
बासी दुगारी बूंदी ऐतिहासिक मंदिर

सांस्कृतिक प्रभाव

  1. मेला:

    • परबतसर में तेजाजी का विशाल मेला (भाद्रपद शुक्ल दशमी)।

  2. कला एवं साहित्य:

    • भोपे “घोड़ला” वाद्य बजाकर फड़ बाँचते हैं।

    • प्रमुख पुस्तकें:

      • तेजाजी रा ब्यावहला (वंशीधर शर्मा)

      • जुझार तेजा (लज्जाराम मेहता)

  3. आधुनिक सम्मान:

    • डाक टिकट जारी (भारत सरकार द्वारा)।

    • लीलण एक्सप्रेस (जयपुर-जोधपुर रेलमार्ग)।

राजल बाई (बूंगरी माता)

  • तेजाजी की बहन, जिन्हें खरनाल में पूजा जाता है।

  • मान्यता: बच्चों की रक्षा करती हैं।

विशेष तथ्य

  • तेजाजी का धागा: सांप से बचाव हेतु हाथ/गले में बाँधा जाता है।

  • हिंदू-मुस्लिम समन्वय: मुस्लिम समुदाय भी इन्हें “तेजा पीर” कहकर पूजता है।

तेजाजी: न्याय, गौरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक! 

“तेजा तलवार, तेजा घोड़ी, तेजा धरती रा कोड़ी!”

(राजस्थानी कहावत: तेजाजी की वीरता अद्वितीय थी)।

Scroll to Top