(पूर्ण जीवन परिचय एवं सांस्कृतिक प्रभाव)
जन्म एवं परिवार
-
जन्मस्थान: खरनाल (नागौर जिला)
-
वंश: जाट समुदाय
-
पिता: ताहड़जी (तारुड़जी)
-
माता: रामकुंवरी
-
पत्नी: पेमलदे (पनेर, अजमेर)
-
बहन: राजल बाई (बूंगरी माता)
-
-
घोड़ी: लीलण (इनके नाम पर “लीलण एक्सप्रेस” रेलगाड़ी चलती है)
वीरगति की कथा
-
गौरक्षक: लाछा नामक गुर्जर महिला की गायों को बचाते हुए घायल हुए।
-
मृत्यु: सुरसुरा गाँव (अजमेर) में सांप के काटने से देहांत।
-
मान्यता: मृत्यु से पहले सांप को “दर्शन मात्र से विषहीन” होने का वरदान दिया।
-
धार्मिक महत्व
-
उपनाम:
-
“काला-बाला का देवता” (काले बैल और गायों के रक्षक)
-
“सर्परक्षक देवता” (सांप काटने पर तेजाजी का धागा बाँधा जाता है)
-
-
कृषि संस्कृति:
-
खेतों में हल चलाते समय तेजाजी के गीत गाए जाते हैं।
-
प्रमुख मंदिर
| स्थान | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| परबतसर | डीडवाना (नागौर) | जोधपुर महाराजा अभय सिंह द्वारा निर्मित |
| खरनाल | नागौर | जन्मस्थान, राजल बाई का मंदिर |
| सुरसुरा | अजमेर | मृत्यु स्थल |
| बासी दुगारी | बूंदी | ऐतिहासिक मंदिर |
प्रमुख मंदिर
| स्थान | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| परबतसर | डीडवाना (नागौर) | जोधपुर महाराजा अभय सिंह द्वारा निर्मित |
| खरनाल | नागौर | जन्मस्थान, राजल बाई का मंदिर |
| सुरसुरा | अजमेर | मृत्यु स्थल |
| बासी दुगारी | बूंदी | ऐतिहासिक मंदिर |
सांस्कृतिक प्रभाव
-
मेला:
-
परबतसर में तेजाजी का विशाल मेला (भाद्रपद शुक्ल दशमी)।
-
-
कला एवं साहित्य:
-
भोपे “घोड़ला” वाद्य बजाकर फड़ बाँचते हैं।
-
प्रमुख पुस्तकें:
-
तेजाजी रा ब्यावहला (वंशीधर शर्मा)
-
जुझार तेजा (लज्जाराम मेहता)
-
-
-
आधुनिक सम्मान:
-
डाक टिकट जारी (भारत सरकार द्वारा)।
-
लीलण एक्सप्रेस (जयपुर-जोधपुर रेलमार्ग)।
-
राजल बाई (बूंगरी माता)
-
तेजाजी की बहन, जिन्हें खरनाल में पूजा जाता है।
-
मान्यता: बच्चों की रक्षा करती हैं।
विशेष तथ्य
-
तेजाजी का धागा: सांप से बचाव हेतु हाथ/गले में बाँधा जाता है।
-
हिंदू-मुस्लिम समन्वय: मुस्लिम समुदाय भी इन्हें “तेजा पीर” कहकर पूजता है।
तेजाजी: न्याय, गौरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक!
“तेजा तलवार, तेजा घोड़ी, तेजा धरती रा कोड़ी!”
(राजस्थानी कहावत: तेजाजी की वीरता अद्वितीय थी)।