तल्लीनाथ जी: मारवाड़ के योद्धा-संत

(विस्तृत जीवन परिचय एवं पारिस्थितिक महत्व)

मूल जानकारी

  • वास्तविक नाम: गोगादेव राठौड़

  • वंश: राठौड़ राजपूत

  • पारिवारिक संबंध:

    • मारवाड़ के राव चूंडा के छोटे भाई

    • वीरमदेव के पुत्र (जिनकी हत्या का बदला लिया)

  • शासन क्षेत्र: शेरगढ़ (नोधपुर) के सामंत

धार्मिक पक्ष

  • गुरु: जलंधरनाथ (नाथ संप्रदाय से संबंध)

  • उपाधि:

    • “ओरण के देवता” (वन संरक्षक)

    • पारिस्थितिक महत्व:

      • पांचोटा (जालौर) स्थित मंदिर के आसपास पवित्र वनक्षेत्र

      • मान्यता: इस क्षेत्र में वृक्ष काटना वर्जित

मंदिर विशेषताएँ

स्थान जिला विशेषता
पांचोटा जालौर मुख्य मंदिर, ओरण संरक्षण
शेरगढ़ नोधपुर ऐतिहासिक सामंत कालीन स्थल

सांस्कृतिक प्रभाव

  1. पर्यावरण संरक्षण:

    • राजस्थान में “ओरण” (पवित्र वन) की अवधारणा को बढ़ावा।

  2. लोक आस्था:

    • किसान इन्हें वर्षा एवं भूमि उर्वरता का देवता मानते हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण

देवता संबंधित स्थल विशेष योगदान
तल्लीनाथ पांचोटा (जालौर) ओरण संरक्षण
जाम्भोजी मुकाम (नोखा) विश्नोई परंपरा
गोगाजी गोगामेड़ी सर्परक्षक

तल्लीनाथजी: शौर्य, संन्यास और प्रकृति संरक्षण की अनूठी मिसाल!

“ओरण री छाँव, तल्लीनाथ री शान!”

(राजस्थानी कहावत: पवित्र वन तल्लीनाथ की महानता का प्रतीक है)।

विशेष नोट: तल्लीनाथ का जीवन राजपूत वीरता एवं नाथ संप्रदाय की तपस्या का अद्भुत संगम दर्शाता है। इनके मंदिर परिसर में पेड़ों का संरक्षण आधुनिक पर्यावरणवाद को प्रेरणा देता है।

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