आलमजी: राजस्थान के अश्वरक्षक लोकदेवता

(संक्षिप्त परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व)

मूल जानकारी

  • मंदिर स्थल: धोरीमन्ना (बाड़मेर जिला)

  • वंश: राठौड़ वंश की जैतमालोत शाखा

  • प्रमुख मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया

धार्मिक महत्व

  1. अश्वरक्षक देवता:

    • घोड़ों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हेतु पूजे जाते हैं।

    • राजपूत योद्धाओं द्वारा विशेष रूप से आराध्य।

  2. ऐतिहासिक संदर्भ:

    • राठौड़ शाखा से संबंधित होने के कारण स्थानीय राजवंशों में प्रतिष्ठित।

ले की विशेषताएँ

  • पशु मेला: घोड़ों की खरीद-बिक्री एवं प्रदर्शनी।

  • धार्मिक अनुष्ठान:

    • घोड़ों को “आलमजी का तिलक” लगाकर पूजा।

    • भोपों द्वारा लोकगाथाओं का गायन।

सांस्कृतिक प्रभाव

  • लोककला: धोरीमन्ना मंदिर में राजपूत शैली की मूर्तिकला।

  • परंपरा: युद्धकाल में घोड़ों की रक्षा हेतु आलमजी का नाम लेना।

तुलनात्मक विश्लेषण

देवता संबंधित वंश रक्षण क्षेत्र
आलमजी राठौड़ (जैतमालोत) घोड़े
पाबूजी राठौड़ ऊँट
तेजाजी जाट गाय/सर्प

आलमजी: राजपूत शौर्य और पशु कल्याण के प्रतीक!

“आलम री अस, घोड़ा राखे सरास!”

(राजस्थानी कहावत: आलमजी की कृपा से घोड़े सुरक्षित रहते हैं)।

विशेष नोट: धोरीमन्ना मंदिर परिसर में प्राचीन अश्वशाला के अवशेष देखे जा सकते हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

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