आलमजी: राजस्थान के अश्वरक्षक लोकदेवताBy rajasthanfactss / August 18, 2025 (संक्षिप्त परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व) मूल जानकारीमंदिर स्थल: धोरीमन्ना (बाड़मेर जिला)वंश: राठौड़ वंश की जैतमालोत शाखाप्रमुख मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया धार्मिक महत्व अश्वरक्षक देवता: घोड़ों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हेतु पूजे जाते हैं। राजपूत योद्धाओं द्वारा विशेष रूप से आराध्य। ऐतिहासिक संदर्भ: राठौड़ शाखा से संबंधित होने के कारण स्थानीय राजवंशों में प्रतिष्ठित। ले की विशेषताएँ पशु मेला: घोड़ों की खरीद-बिक्री एवं प्रदर्शनी। धार्मिक अनुष्ठान: घोड़ों को “आलमजी का तिलक” लगाकर पूजा। भोपों द्वारा लोकगाथाओं का गायन। सांस्कृतिक प्रभाव लोककला: धोरीमन्ना मंदिर में राजपूत शैली की मूर्तिकला। परंपरा: युद्धकाल में घोड़ों की रक्षा हेतु आलमजी का नाम लेना। तुलनात्मक विश्लेषण देवता संबंधित वंश रक्षण क्षेत्र आलमजी राठौड़ (जैतमालोत) घोड़े पाबूजी राठौड़ ऊँट तेजाजी जाट गाय/सर्प आलमजी: राजपूत शौर्य और पशु कल्याण के प्रतीक!“आलम री अस, घोड़ा राखे सरास!”(राजस्थानी कहावत: आलमजी की कृपा से घोड़े सुरक्षित रहते हैं)। विशेष नोट: धोरीमन्ना मंदिर परिसर में प्राचीन अश्वशाला के अवशेष देखे जा सकते हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।