जुसार जी: राजस्थान के लोकदेवता एवं विवाह के संरक्षकBy rajasthanfactss / August 18, 2025 Table of Contents (विस्तृत जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व) मूल जानकारी जन्मस्थान: रमलोहा (राजस्थान) मंदिर स्थल: स्यालोदा (नीम का थाना, सीकर जिला) प्रमुख मेला: रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) मंदिर की विशेषताएँ मूर्तियाँ: दूल्हा-दुल्हन की मूर्तियाँ (विवाह के प्रतीक) तीन भाइयों की मूर्तियाँ (पारिवारिक एकता का संदेश) स्थापत्य: राजस्थानी लोक शैली में निर्मित। धार्मिक महत्व विवाह संरक्षक: नवविवाहित जोड़े मंदिर में आशीर्वाद लेने आते हैं। विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने हेतु पूजा। परिवार कल्याण: भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक सद्भाव का प्रतीक। मेले की विशेषताएँ रामनवमी पर विशाल आयोजन: विवाहित जोड़ों द्वारा विशेष पूजा। लोकनृत्य (घूमर, गीर) और लोकगीतों का आयोजन। सांस्कृतिक प्रभाव लोककथाएँ: जुसार जी को पारिवारिक एकता का देवता माना जाता है। परंपरा: मंदिर में सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी) चढ़ाने का रिवाज़। तुलनात्मक विश्लेषण देवता मंदिर स्थल विशेष योगदान जुसार जी स्यालोदा (सीकर) विवाह एवं पारिवारिक सद्भाव सावित्री-सत्यवान बिजारण (झुंझुनू) पतिव्रता धर्म तेजाजी परबतसर (नागौर) सर्प/गौरक्षक जुसार जी: प्रेम, विवाह और परिवार की अखंडता के प्रतीक!“जुसार री छाप, विवाह री आस!”(राजस्थानी कहावत: जुसार जी विवाह की आशा बनाए रखते हैं)। विशेष नोट: स्यालोदा मंदिर में “गठजोड़” नामक अनुष्ठान होता है, जहाँ नवदंपति हाथ में हाथ डालकर जुसार जी से आशीर्वाद लेते हैं।