महत्व एवं विशेषताएँ:
कृषि से जुड़ा महत्वपूर्ण मेला:
यह मेला किसानों द्वारा अच्छी फसल की कामना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।
इसे “बुड्ढा जोहड़ मेला” या “बुद्धानोहर मेला” भी कहा जाता है।
स्थान एवं समय:
स्थान: श्रीगंगानगर जिले के बुड्ढा जोहड़ (एक प्रसिद्ध तालाब/जलाशय) के पास आयोजित होता है।
समय: प्रतिवर्ष मॉनसून के बाद (अगस्त-सितंबर) में लगता है, जब किसान नई फसल की आशा करते हैं।
मेले की गतिविधियाँ:
किसान अपने खेतों की उपज और पशुओं को लेकर आते हैं।
कृषि उपकरणों, बीजों और जैविक खाद की प्रदर्शनी लगाई जाती है।
लोक नृत्य (भंगड़ा, गिद्दा) और गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है।
मेले में मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों की भी भरमार रहती है।
धार्मिक पहलू:
किसान जोहड़ (तालाब) के किनारे पूजा-अर्चना करते हैं और जल देवता को धन्यवाद देते हैं।
कुछ लोग पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं, जिसे किसानी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सामाजिक महत्व:
यह मेला ग्रामीण एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है।
किसान एक-दूसरे से खेती की नई तकनीकों का ज्ञान साझा करते हैं।
क्यों है खास?
राजस्थान के उत्तरी भाग (श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़) में किसानों का यह प्रमुख सामाजिक-धार्मिक आयोजन है।
यहाँ गन्ना, कपास और सरसों की खेती प्रमुख है, इसलिए मेले में इन फसलों से जुड़े उत्पाद भी देखने को मिलते हैं।
बुड्ढा जोहड़ मेला किसानों की आस्था, उम्मीद और हर्षोल्लास का प्रतीक है!