जैन समुदाय के प्रमुख त्योहार एवं पर्व

1. प्रभातदेव / आदिनाथ जयंती (चैत्र कृष्ण नवमी)

  • महत्व:

    • प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्मोत्सव

  • मेला:

    • घुलेव गाँव (उदयपुर)

    • भील जनजाति इन्हें “केसरिया जी/काला जी” के नाम से पूजते हैं

2. महावीर जयंती (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी)

  • महत्व:

    • 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मदिन

    • जैन मंदिरों में अभिषेक, रथयात्रा और प्रवचन

3. रोट तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया)

  • विशेषता:

    • जैन महिलाएँ रोट (गेहूं के आटे की पूड़ी) बनाकर दान करती हैं

    • संयम और सात्विक भोजन का महत्व

4. सुगंध दशमी / धूप दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी)

  • परंपरा:

    • मंदिरों में धूप-सुगंध से पूजा

    • 10 प्रकार के पुष्पों का उपयोग

5. दसलक्षण पर्व (भाद्रपद शुक्ल पंचमी से त्रयोदशी)

  • महत्व:

    • जैन धर्म के 10 मूल गुणों (क्षमा, मार्दव, आर्जव आदि) का अनुशीलन

    • दिगंबर परंपरा:

      • भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक

      • पड़वा ढोलक (अश्विन कृष्ण एकम): क्षमा याचना का दिन

    • श्वेतांबर परंपरा:

      • भाद्रपद कृष्ण द्वादशी से शुक्ल चतुर्थी तक

      • संवत्सरी (भाद्रपद शुक्ल पंचमी): मुख्य क्षमावाणी दिवस

राजस्थान में जैन संस्कृति

  • माउंट आबू (दिलवाड़ा मंदिर): महावीर जयंती पर विशेष आयोजन

  • रानकपुर (पाली): दसलक्षण पर्व पर हजारों श्रद्धालु

विशेष तथ्य

  • भाद्रपद के दसलक्षण पर्व को “परीक्षण पर्व” भी कहते हैं

  • संवत्सरी पर “मिच्छामी दुक्कड़म” (सभी से क्षमा याचना) का महत्व

जैन पर्व: अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश!

“क्षमा वीरस्य भूषणम्” (क्षमा वीर का आभूषण है)

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