जैन समुदाय के प्रमुख त्योहार एवं पर्वBy rajasthanfactss / August 17, 2025 1. प्रभातदेव / आदिनाथ जयंती (चैत्र कृष्ण नवमी)महत्व:प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्मोत्सवमेला:घुलेव गाँव (उदयपुर)भील जनजाति इन्हें “केसरिया जी/काला जी” के नाम से पूजते हैं 2. महावीर जयंती (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी)महत्व:24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मदिनजैन मंदिरों में अभिषेक, रथयात्रा और प्रवचन 3. रोट तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया)विशेषता:जैन महिलाएँ रोट (गेहूं के आटे की पूड़ी) बनाकर दान करती हैंसंयम और सात्विक भोजन का महत्व 4. सुगंध दशमी / धूप दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी)परंपरा:मंदिरों में धूप-सुगंध से पूजा10 प्रकार के पुष्पों का उपयोग 5. दसलक्षण पर्व (भाद्रपद शुक्ल पंचमी से त्रयोदशी)महत्व:जैन धर्म के 10 मूल गुणों (क्षमा, मार्दव, आर्जव आदि) का अनुशीलनदिगंबर परंपरा:भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तकपड़वा ढोलक (अश्विन कृष्ण एकम): क्षमा याचना का दिनश्वेतांबर परंपरा:भाद्रपद कृष्ण द्वादशी से शुक्ल चतुर्थी तकसंवत्सरी (भाद्रपद शुक्ल पंचमी): मुख्य क्षमावाणी दिवस राजस्थान में जैन संस्कृतिमाउंट आबू (दिलवाड़ा मंदिर): महावीर जयंती पर विशेष आयोजनरानकपुर (पाली): दसलक्षण पर्व पर हजारों श्रद्धालु विशेष तथ्यभाद्रपद के दसलक्षण पर्व को “परीक्षण पर्व” भी कहते हैंसंवत्सरी पर “मिच्छामी दुक्कड़म” (सभी से क्षमा याचना) का महत्वजैन पर्व: अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश!“क्षमा वीरस्य भूषणम्” (क्षमा वीर का आभूषण है)