निरंजनी सम्प्रदाय

राजस्थान के एक ऐसे अनूठे भक्ति सम्प्रदाय के बारे में जिसने सगुण भक्ति की मधुर धारा को समृद्ध किया – निरंजनी सम्प्रदाय। यह सम्प्रदाय अपनी सरल भक्ति और जीवन के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

प्रमुख धार्मिक सम्प्रदाय

निरंजनी सम्प्रदाय राजस्थान में उत्पन्न एक प्रमुख भक्ति सम्प्रदाय है जिसकी स्थापना हरिदास जी ने की थी। यह सम्प्रदाय मुख्य रूप से नागौर क्षेत्र में फैला हुआ है और सगुण भक्ति पर बल देता है। इस सम्प्रदाय की विशेष बात यह है कि इस संप्रदाय में परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा जाता है

सम्प्रदाय

निरंजनी सम्प्रदाय एक ऐसा भक्ति मार्ग है जो सरलता और व्यावहारिकता में विश्वास रखता है। इस सम्प्रदाय में गृहस्थ जीवन और साधना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। निहंग व घरबारी इस संप्रदाय के अनुयायी हैं – निहंग संन्यासी जीवन व्यतीत करते हैं जबकि घरबारी गृहस्थ जीवन में रहकर भक्ति करते हैं।

प्रवर्तक

इस महान सम्प्रदाय के संस्थापक हरिदास जी हैं। हरिदास जी एक महान संत और भक्त थे जिन्होंने अपनी सरल शिक्षाओं और भक्ति भाव से लोगों के हृदय को छुआ। उन्होंने गृहस्थ और संन्यासी दोनों प्रकार के साधकों के लिए भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

सगुण /निर्गुण

निरंजनी सम्प्रदाय सगुण भक्ति में विश्वास रखता है। यह सम्प्रदाय ईश्वर के सगुण रूप की उपासना पर बल देता है। इसके अनुयायी ईश्वर के सगुण रूप की भक्ति को ही मोक्ष का साधन मानते हैं और ‘अलख निरंजन’ की उपासना करते हैं।

प्रमुख पीठ/मंदिर

निरंजनी सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र गाढ़ा गाँव (डीडवाना-नागौर) में स्थित है। यह स्थान निरंजनी सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहाँ का मंदिर इस सम्प्रदाय की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।

रचनाएँ प्रमुख ग्रंथ

निरंजनी सम्प्रदाय की समृद्ध साहित्यिक परंपरा है:

हरिदास कृत:

  • भक्त विरदावली

  • श्री हरिपुरुष जी की वाणी

  • भर्तृहरि संवाद

  • यंत्र राजप्रकाश

  • त्यौहलो

  • जोग ग्रंथ

विशिष्ट तथ्य

निरंजनी सम्प्रदाय की कुछ विशेष बातें इस प्रकार हैं:

  1. परमात्मा का नाम: इस संप्रदाय में परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा जाता है

  2. अनुयायी: निहंग व घरबारी इस संप्रदाय के अनुयायी हैं

  3. साधना पद्धति: गृहस्थ और संन्यासी दोनों के लिए अलग-अलग साधना मार्ग

  4. भौगोलिक केंद्र: मुख्य रूप से नागौर जिले में प्रसार

  5. दार्शनिक आधार: सगुण भक्ति और व्यावहारिक जीवन का समन्वय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन हैं?
निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक हरिदास जी हैं।

2. इस सम्प्रदाय में परमात्मा को क्या कहा जाता है?
इस संप्रदाय में परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा जाता है

3. निरंजनी सम्प्रदाय के कितने प्रकार के अनुयायी हैं?
निहंग व घरबारी इस संप्रदाय के अनुयायी हैं – निहंग संन्यासी और घरबारी गृहस्थ होते हैं।

4. इस सम्प्रदाय का मुख्य केंद्र कहाँ स्थित है?
इस सम्प्रदाय का मुख्य केंद्र गाढ़ा गाँव (डीडवाना-नागौर) में स्थित है।

5. हरिदास जी की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
हरिदास जी की प्रमुख रचनाओं में भक्त विरदावली, श्री हरिपुरुष जी की वाणी, भर्तृहरि संवाद, यंत्र राजप्रकाश, त्यौहलो, जोग ग्रंथ शामिल हैं।

6. यह सम्प्रदाय सगुण उपासना में विश्वास रखता है या निर्गुण?
निरंजनी सम्प्रदाय सगुण भक्ति में विश्वास रखता है।

निष्कर्ष

निरंजनी सम्प्रदाय राजस्थान की भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसने सगुण भक्ति और व्यावहारिक जीवन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। हरिदास जी की शिक्षाओं ने इस सम्प्रदाय को एक विशेष पहचान दी। ‘अलख निरंजन’ की उपासना और निहंग-घरबारी की दोहरी साधना पद्धति इसकी अनूठी विशेषताएं हैं। गाढ़ा गाँव स्थित मुख्य केंद्र से यह सम्प्रदाय पूरे region में फैला और हरिदास जी की रचनाओं ने इसकी साहित्यिक विरासत को समृद्ध किया। निरंजनी सम्प्रदाय की यह सरल और व्यावहारिक भक्ति परंपरा आज भी अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का कार्य कर रही है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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