हिंदू त्योहार और विक्रमी संवत् (चंद्र-सौर कैलेंडर)

हिंदू त्योहार और विक्रमी संवत् (चंद्र-सौर कैलेंडर)

हिंदू पंचांग विक्रमी संवत् पर आधारित है, जो चंद्रमा की गति (चंद्र मास) और सूर्य की स्थिति (सौर संवत्) को मिलाकर बनाया गया है।

  1. अधिक मास (मलमास):

    • हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं।

    • यह चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच समन्वय बनाने के लिए होता है।

विक्रमी संवत् के महीने:

क्रमांक हिंदू मास अंग्रेजी माह (लगभग)
1 चैत्र मार्च-अप्रैल
2 वैशाख अप्रैल-मई
3 ज्येष्ठ मई-जून
4 आषाढ़ जून-जुलाई
5 श्रावण जुलाई-अगस्त
6 भाद्रपद अगस्त-सितंबर
7 आश्विन सितंबर-अक्टूबर
8 कार्तिक अक्टूबर-नवंबर
9 मार्गशीर्ष नवंबर-दिसंबर
10 पौष दिसंबर-जनवरी
11 माघ जनवरी-फरवरी
12 फाल्गुन फरवरी-मार्च

हिंदू त्योहारों का चक्र

राजस्थानी कहावत:
“तीज त्योहारां बावड़ी ले डूबी गणगौर”
(तीज से शुरू होकर गणगौर तक त्योहारों की बाढ़ आ जाती है।)

  1. नववर्ष:

    • चैत्र शुक्ल एकम् (विक्रम संवत् का प्रारंभ)

  2. प्रथम त्योहार:

    • छोटी तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) – हरियाली तीज, मनसून की शुरुआत का उत्सव।

  3. अंतिम त्योहार:

    • गणगौर (चैत्र शुक्ल तृतीया) – पार्वती-शिव की पूजा, विवाहित महिलाओं का प्रमुख पर्व।

हिंदू त्योहारों का संक्षिप्त क्रम:

  • चैत्र: नवरात्रि, रामनवमी, गणगौर

  • वैशाख: अक्षय तृतीया, बुद्ध पूर्णिमा

  • ज्येष्ठ: निर्जला एकादशी, वट सावित्री

  • आषाढ़: गुरु पूर्णिमा, देवछठ

  • श्रावण: हरियाली तीज, रक्षाबंधन, नाग पंचमी

  • भाद्रपद: कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज

  • आश्विन: नवरात्रि, दशहरा, शरद पूर्णिमा

  • कार्तिक: करवा चौथ, दीपावली, छठ पूजा

  • मार्गशीर्ष: मोक्षदा एकादशी

  • पौष: पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति

  • माघ: बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि

  • फाल्गुन: होली, फाल्गुन पूर्णिमा

विशेष:

  • तीज और गणगौर राजस्थान व पश्चिमी भारत के प्रमुख त्योहार हैं।

  • अधिक मास में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन भक्ति अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है।

हिंदू पंचांग प्रकृति और ऋतुओं के साथ गहराई से जुड़ा है, जिसमें हर त्योहार का एक खगोलीय व धार्मिक महत्व है।

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