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खनिज प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित, एक निश्चित रासायनिक संघटन वाले पदार्थ होते हैं। ये सभी स्थानों पर समान रूप से वितरित नहीं, बल्कि विशिष्ट भूवैज्ञानिक संरचनाओं में केन्द्रित होते हैं। इस दृष्टि से राजस्थान भारत के सर्वाधिक समृद्ध राज्यों में से एक है, जिसे अक्सर “खनिजों का अजायबघर” कहा जाता है।
राजस्थान की खनिज समृद्धि: एक नजर में
खनिज विविधता: राज्य में 81 विभिन्न प्रकार के खनिजों के भंडार हैं।
सक्रिय खनन: इनमें से वर्तमान में 57 खनिजों का खनन किया जा रहा है।
पट्टे एवं लाइसेंस: राज्य में प्रधान खनिजों के 187, अप्रधान खनिजों के 14,420 खनन पट्टे तथा 17,534 खदान लाइसेंस क्रियाशील हैं।
राजस्व: वित्तीय वर्ष 2019-20 (दिसंबर 2019 तक) में खनन क्षेत्र से 3,076.98 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।
राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख खनिज एवं राजस्थान की स्थिति
राजस्थान कई खनिजों का अग्रणी उत्पादक है, कुछ का तो एकमात्र उत्पादक है।
| श्रेणी | खनिज / अयस्क | राजस्थान का राष्ट्रीय स्थान / टिप्पणी |
|---|---|---|
| एकमात्र उत्पादक | सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट, जैस्पर, वॉलेस्टोनाइट | देश में 100% उत्पादन। |
| प्रमुख उत्पादक (90%+) | चाँदी, केल्साइट, जिप्सम | देश का लगभग पूरा उत्पादन। |
| अग्रणी उत्पादक | बॉल क्ले, फॉस्फोराइट, ओकर, स्टिएटाइट, फेल्सपार, फायर क्ले | देश में प्रमुख हिस्सेदारी। |
| आयामी/सजावटी पत्थर | संगमरमर, सेंडस्टोन, ग्रेनाइट | देश में प्रमुख स्थान। |
| औद्योगिक कच्चा माल | सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर, स्टील ग्रेड चूना पत्थर | देश का अग्रणी उत्पादक। |
प्रमुख क्षेत्र:
सीसा-जस्ता: जावर (उदयपुर), राजपुरा-दरीबा (सीकर/अलवर), रामपुरा-आगूचा (भीलवाड़ा)।
संगमरमर: मकराना (नागौर), राजनगर (उदयपुर), अंता (झालावाड़)।
लिग्नाइट/कोयला: बीकानेर, नागौर, बाड़मेर (कपूरडी जैसे कोयला ब्लॉक)।
तांबा: झुंझुनूं, अलवर, भीलवाड़ा, सिरोही।
रॉक फॉस्फेट: उदयपुर, जैसलमेर, बाँसवाड़ा।
खनिज सर्वेक्षण, प्रबंधन एवं अवैध खनन नियंत्रण
राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन और प्रबंधन के लिए सक्रिय है।
1. सघन खनिज सर्वेक्षण एवं पूर्वेक्षण योजना (IPS) – 2019-20 की प्रगति:
| कार्य की प्रकृति | वार्षिक लक्ष्य | दिसंबर 2019 तक उपलब्धि |
|---|---|---|
| क्षेत्रीय खनिज सर्वेक्षण | 300 वर्ग किमी | 175.00 वर्ग किमी |
| क्षेत्रीय भू-गर्भीय मानचित्रण | 336 वर्ग किमी | 219.48 वर्ग किमी |
| विस्तृत भू-गर्भीय मानचित्रण | 52.41 वर्ग किमी | 52.41 वर्ग किमी |
| छिद्रण (ड्रिलिंग) | 8900 मीटर | 1907.50 मीटर |
| भू-भौतिकी सर्वेक्षण | 82 लाइन किमी | 55.00 लाइन किमी |
2. अवैध खनन पर नियंत्रण (2018-19 vs 2019-20*):
दर्ज प्रकरण: 16,856 (2018-19) → 10,213 (2019-20*)।
दर्ज एफ.आई.आर.: 1,908 → 672।
जब्त वाहन/मशीन: 17,383 → 10,269।
वसूल जुर्माना: 106.79 करोड़ रुपये → 59.60 करोड़ रुपये।
(*दिसंबर 2019 तक)
3. डी.एम.एफ. ट्रस्ट (DMFT):
जिला खनिज न्यास (DMF) निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है। 2019-20 में खनन उपागम सड़कों के निर्माण के लिए 62.8765 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML)
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) एक प्रमुख राज्य उद्यम है जिसकी स्थापना राज्य के खनिजों का वैज्ञानिक अन्वेषण, उत्खनन, प्रसंस्करण और विपणन करने के लिए की गई थी। यह रॉक फॉस्फेट, जिप्सम, लाइमस्टोन आदि के खनन में अग्रणी भूमिका निभाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राजस्थान को ‘खनिजों का अजायबघर’ क्यों कहा जाता है?
राजस्थान में भारत में पाए जाने वाले लगभग सभी प्रकार के खनिज उपलब्ध हैं। यहाँ 81 विभिन्न प्रकार के खनिजों के भंडार हैं, जो अद्वितीय विविधता प्रदर्शित करते हैं। कई खनिजों जैसे सीसा-जस्ता, जिप्सम, संगमरमर आदि में यह देश का अग्रणी उत्पादक है।
2. राजस्थान किन खनिजों का देश का एकमात्र उत्पादक है?
राजस्थान सीसा एवं जस्ता अयस्क, सेलेनाइट, जैस्पर और वॉलेस्टोनाइट का भारत का एकमात्र उत्पादक राज्य है।
3. संगमरमर के लिए राजस्थान के कौन-से क्षेत्र प्रसिद्ध हैं?
राजस्थान का मकराना (नागौर) विश्व प्रसिद्ध सफेद संगमरमर के लिए जाना जाता है। अन्य प्रमुख क्षेत्र राजनगर (उदयपुर), अंता (झालावाड़), बिजौलिया (भीलवाड़ा) और झिरी (अजमेर) हैं।
4. अवैध खनन रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार अवैध खनन पर कड़ी नजर रख रही है। ई-रवाना पोर्टल (खनिज परिवहन ट्रैकिंग), खनन पट्टों की ई-नीलामी, भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण बढ़ाने, और सख्त कानूनी कार्रवाई (जुर्माना, वाहन जब्ती, एफ.आई.आर.) के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा रही है।
5. खनन से प्राप्त आय का एक हिस्सा स्थानीय विकास के लिए कैसे उपयोग होता है?
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत जिला खनिज न्यास (DMF) का गठन किया गया है। खनन कंपनियों द्वारा इस न्यास में जमा की गई राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए किया जाता है।