गोगाजी चौहान: राजस्थान के सर्परक्षक लोकदेवता

(पूर्ण जीवन परिचय एवं धार्मिक महत्व)

जन्म एवं परिवार

  • जन्मस्थान: ददरेवा (चुरु जिला)

  • वंश: चौहान राजपूत

    • पिता: जेवर सिंह

    • माता: बाछलदे (कुछ स्रोतों में ‘कमलादे’)

    • पत्नी: मेनलदे (सिरसा, हरियाणा की राजकुमारी)

ऐतिहासिक योगदान

  1. महमूद गजनवी से संघर्ष:

    • गजनवी ने इन्हें “जाहिर पीर” (साक्षात देवता) की उपाधि दी।

  2. वीरगति:

    • अपने मौसेरे भाइयों अरजन-सरजन से गायों की रक्षा करते हुए शहीद हुए।

धार्मिक महत्व

  • सर्परक्षक देवता: सांपों के काटने पर इनका नाम लिया जाता है।

  • हिंदू-मुस्लिम एकता:

    • मुसलमान इन्हें “गोगा पीर” कहकर पूजते हैं।

    • गोगामेड़ी मंदिर (हनुमानगढ़) में “बिस्मिल्लाह” लिखा हुआ है।

  • प्रतीक:

    • खेजड़ी वृक्ष के नीचे मंदिर बनाए जाते हैं।

    • नीले झंडे (गोगाजी का प्रतीक) चढ़ाए जाते हैं।

प्रमुख मंदिर

स्थान जिला विशेषता
शीर्षमेड़ी ददरेवा (चुरु) जन्मस्थान
धुरमेड़ी (गोगामेड़ी) हनुमानगढ़ मकबरेनुमा मंदिर
गोगाजी री ओली खिलेरियों की ढाणी (सांचौर) लोक आस्था का केंद्र

सांस्कृतिक प्रभाव

  • मेला: भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगामेड़ी मेला (हनुमानगढ़) आयोजित।

  • लोकसाहित्य:

    • “गोगाजी रा सावला” (बीठू मेहाजी द्वारा रचित)।

    • “गोगा पवाड़ा” (लोकगाथा) में उनकी वीरता का वर्णन।

  • कला:

    • भोपे “जंतर” (वाद्ययंत्र) बजाकर गोगाजी की कथा सुनाते हैं।

विशेष तथ्य

  • गोगाजी की फड़: चित्रित कपड़े पर उनकी गाथा बाँची जाती है।

  • राजस्थान-हरियाणा सीमा पर इनकी पूजा विशेष प्रचलित है।

  • मान्यता: गोगाजी के नाम का धागा (गोगा धागा) बाँधने से सर्पदंश से बचाव होता है।

गोगाजी: सांपों के भगवान और साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक!

 “गोगा धरती, गोगा आकास, गोगा पीर की होय आस!”

(राजस्थानी लोकोक्ति: गोगाजी की कृपा सर्वव्यापी है)।

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