निम्बार्क सम्प्रदाय

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भारतीय दर्शन के एक प्रमुख वैदिक सम्प्रदाय के बारे में जिसने भक्ति और ज्ञान का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया – निम्बार्क सम्प्रदाय। यह सम्प्रदाय वैष्णव भक्ति की एक महत्वपूर्ण धारा है जो द्वैताद्वैत दर्शन पर आधारित है।

प्रमुख धार्मिक सम्प्रदाय

निम्बार्क सम्प्रदाय भारतीय वैष्णव परंपरा का एक प्रमुख सम्प्रदाय है जिसकी स्थापना आचार्य निम्बार्क ने की थी। यह सम्प्रदाय वेदांत दर्शन की द्वैताद्वैत शाखा का प्रतिनिधित्व करता है और कृष्ण-राधा की युगल उपासना पर विशेष बल देता है। राजस्थान में इस सम्प्रदाय का विशेष महत्व है और यहाँ इसकी एक प्रमुख पीठ स्थित है।

सम्प्रदाय

निम्बार्क सम्प्रदाय एक ऐसा दार्शनिक और आध्यात्मिक मार्ग है जो जीव और ब्रह्म के बीच द्वैत और अद्वैत के समन्वय में विश्वास रखता है। इस सम्प्रदाय को सनकादि संप्रदाय भी कहा जाता है, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाता है। यह सम्प्रदाय भक्ति के साथ-साथ ज्ञान को भी समान महत्व देता है।

प्रवर्तक

इस महान सम्प्रदाय के संस्थापक आचार्य निम्बार्क हैं। आचार्य निम्बार्क एक महान दार्शनिक और संत थे जिन्होंने द्वैताद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया। उन्होंने भक्ति और ज्ञान के समन्वय पर बल देते हुए इस सम्प्रदाय की स्थापना की जो आज तक चली आ रही है।

सगुण /निर्गुण

निम्बार्क सम्प्रदाय सगुण भक्ति में विश्वास रखता है। यह सम्प्रदाय विशेष रूप से श्रीकृष्ण और राधा की युगल उपासना पर बल देता है। इसके अनुयायी ईश्वर के सगुण रूप की भक्ति को ही मोक्ष का साधन मानते हैं और कृष्ण-राधा की लीला का गायन करते हुए भक्ति मार्ग पर अग्रसर रहते हैं।

प्रमुख पीठ/मंदिर

निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रमुख पीठ हैं:

  • वृंदावन (उत्तर प्रदेश) – यह इस सम्प्रदाय का मुख्य केंद्र है

  • सलेमाबाद (अजमेर, राजस्थान) – राजस्थान में प्रमुख पीठ

  • उदयपुर – राजस्थान में अन्य प्रमुख पीठ

विशेष तथ्य: राजस्थान में सलेमाबाद पीठ की स्थापना परशुराम देवाचार्य ने की।

रचनाएँ प्रमुख ग्रंथ

निम्बार्क सम्प्रदाय की समृद्ध साहित्यिक परंपरा है:

आचार्य निम्बार्क कृत:

  • वेदांत पारिजात भाष्य – यह निम्बार्क सम्प्रदाय का मूलभूत ग्रंथ है

परशुराम कृत:

  • साखी का जोड़ा

  • छंद का जोड़ा

  • रघुनाथ चरित

  • विप्रमती

  • सिगार सुदामा

  • द्रौपदी का जोड़ चरित

विशिष्ट तथ्य

निम्बार्क सम्प्रदाय की कुछ विशेष बातें इस प्रकार हैं:

  1. दार्शनिक आधार: यह सम्प्रदाय द्वैताद्वैत दर्शन पर आधारित है

  2. उपासना पद्धति: कृष्ण-राधा की युगल उपासना पर विशेष बल

  3. वैकल्पिक नाम: इस सम्प्रदाय को सनकादि संप्रदाय भी कहा जाता है

  4. राजस्थान में प्रसार: सलेमाबाद पीठ इस सम्प्रदाय का राजस्थान में प्रमुख केंद्र है

  5. स्थापना: राजस्थान में सलेमाबाद पीठ की स्थापना परशुराम देवाचार्य ने की

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. निम्बार्क सम्प्रदाय के संस्थापक कौन हैं?
निम्बार्क सम्प्रदाय के संस्थापक आचार्य निम्बार्क हैं।

2. यह सम्प्रदाय सगुण उपासना में विश्वास रखता है या निर्गुण?
निम्बार्क सम्प्रदाय सगुण भक्ति में विश्वास रखता है और कृष्ण-राधा की युगल उपासना पर बल देता है।

3. इस सम्प्रदाय का प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है?
इस सम्प्रदाय का प्रमुख पीठ वृंदावन (उत्तर प्रदेश) में है। राजस्थान में सलेमाबाद (अजमेर) में प्रमुख पीठ स्थित है।

4. निम्बार्क सम्प्रदाय का वैकल्पिक नाम क्या है?
इस सम्प्रदाय को सनकादि संप्रदाय भी कहा जाता है।

5. आचार्य निम्बार्क की प्रमुख रचना कौन-सी है?
आचार्य निम्बार्क की प्रमुख रचना ‘वेदांत पारिजात भाष्य’ है।

6. राजस्थान में सलेमाबाद पीठ की स्थापना किसने की?
राजस्थान में सलेमाबाद पीठ की स्थापना परशुराम देवाचार्य ने की।

निष्कर्ष

निम्बार्क सम्प्रदाय भारतीय वैष्णव परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसने द्वैताद्वैत दर्शन और कृष्ण-राधा की युगल उपासना के माध्यम से भक्ति की एक अनूठी धारा प्रवाहित की। आचार्य निम्बार्क के दार्शनिक विचारों और परशुराम देवाचार्य जैसे संतों के प्रयासों से यह सम्प्रदाय राजस्थान सहित पूरे भारत में फैला। सलेमाबाद पीठ इस सम्प्रदाय का राजस्थान में प्रमुख केंद्र बना और आज भी यहाँ से इसकी परंपराएँ जीवित हैं। निम्बार्क सम्प्रदाय की सगुण भक्ति और दार्शनिक गहनता आज भी लोगों को आकर्षित करती है और भक्ति के क्षेत्र में इसका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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