1. मार्गशीर्ष मास (नवंबर-दिसंबर)
इसे अगहन मास भी कहते हैं।
प्रमुख धार्मिक गतिविधियाँ:
गीता जयंती (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी): भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश इसी दिन दिया था।
मोक्षदा एकादशी: व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
दत्तात्रेय जयंती: मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है।
राजस्थान से जुड़ी परंपराएँ:
इस महीने में किसान फसल कटाई के बाद विश्राम करते हैं।
लोकगीतों और भजनों का आयोजन होता है।
2. पौष मास (दिसंबर-जनवरी)
इसे तेवड़ा मास भी कहा जाता है।
प्रमुख धार्मिक गतिविधियाँ:
पौष पूर्णिमा: इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है।
मकर संक्रांति (14-15 जनवरी):
पौष मास का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर मनाया जाता है।
राजस्थान में “सकरात” के नाम से जाना जाता है।
पतंगबाजी, तिल-गुड़ के व्यंजन और दान-पुण्य की परंपरा।
राजस्थान से जुड़ी परंपराएँ:
ऊँटों की दौड़ (बीकानेर): मकर संक्रांति पर आयोजित होती है।
किसान नई फसल का उत्सव मनाते हैं।
विशेष तथ्य:
मार्गशीर्ष और पौष मास में बड़े त्योहार तो नहीं, पर धार्मिक व्रत-उपवास और प्रकृति-संबंधी परंपराएँ प्रमुख हैं।
इन महीनों में ठंड का मौसम होने के कारण, लोकजीवन में सामुदायिक भोज, गीत-संगीत और धार्मिक चर्चाएँ अधिक होती हैं।
नोट: राजस्थान में इन महीनों में मेले कम होते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर पुष्कर, बीकानेर और जैसलमेर में विशेष आयोजन होते हैं।
🌾 मार्गशीर्ष-पौष: शांति, साधना और नई फसल का समय!