कृष्ण पक्ष
चतुर्थी – करवा चौथ
सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
चाँद देखकर व्रत खोलने की रस्म।
अष्टमी – अहोई अष्टमी
संतान की सुरक्षा हेतु माताओं द्वारा व्रत।
अहोई माता की पूजा और कथा सुनना।
त्रयोदशी – धनतेरस (धन्वंतरि जयंती)
धन एवं स्वास्थ्य की देवता धन्वंतरि की पूजा।
सोना-चाँदी या बर्तन खरीदने की परंपरा।
चतुर्दशी – रूप चतुर्दशी
सौंदर्य और स्वास्थ्य की कामना हेतु पूजा।
अमावस्या – दीपावली
महत्व:
भगवान महावीर का निर्वाण दिवस।
स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण दिवस।
घरों में दीपमाला, लक्ष्मी पूजन और पटाखे।
शुक्ल पक्ष
प्रतिपदा (एकम) – गोवर्धन पूजा
अन्नकूट महोत्सव (नाथद्वारा में विशेष):
भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाए जाते हैं।
भील जनजाति द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ।
द्वितीया – भाई दूज (यम द्वितीया)
भाई-बहन के प्रेम का त्योहार।
बहनें भाई को टीका लगाकर मिठाई खिलाती हैं।
अष्टमी – गोपाष्टमी
गायों की पूजा का दिन।
नवमी – आँवला नवमी (अक्षय नवमी)
आँवले के वृक्ष की पूजा, स्वास्थ्य लाभ हेतु।
एकादशी – देवउठनी एकादशी
अन्य नाम: प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी एकादशी।
पुष्कर मेला प्रारंभ (अजमेर)।
तुलसी विवाह की रस्म।
पूर्णिमा – सत्यनारायण पूर्णिमा
सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ।
प्रमुख मेले
पुष्कर मेला (अजमेर)
तीर्थराज (तीर्थों का राजा) एवं कोंकण तीर्थ।
मुख्य स्थल:
ब्रह्मा मंदिर (विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर)।
सावित्री मंदिर, गायत्री मंदिर, रंगनाथ मंदिर।
52 घाट और 500 मंदिर।
तीयों का मामा (तीर्थयात्रियों के लिए विशेष महत्व)।
कोलायत मेला (बीकानेर)
कपिल मुनि का आश्रम (सांख्य दर्शन के प्रवर्तक)।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का महत्व।
चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन)
चन्द्रभागा नदी के तट पर आयोजित।
रामेश्वरम मेला (सवाई माधोपुर)
चम्बल, बनास और सीप नदियों का संगम।
हाड़ौती का सुरंगा मेला
पशु मेला (मालवी नस्ल के पशुओं की बिक्री)।
रोचक तथ्य
तीरथों का भांजा: मचकुंड (धौलपुर)।
तीर्थों की रानी: देवयानी (सांभर, जयपुर)।
पुष्कर मेले में ऊँटों की दौड़ और कल्चरल प्रोग्राम आकर्षण का केंद्र होते हैं।
कार्तिक मास भक्ति, प्रकाश और समृद्धि का संगम है!