कार्तिक मास के त्योहार एवं मेले

कृष्ण पक्ष

  1. चतुर्थी – करवा चौथ

    • सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।

    • चाँद देखकर व्रत खोलने की रस्म।

  2. अष्टमी – अहोई अष्टमी

    • संतान की सुरक्षा हेतु माताओं द्वारा व्रत।

    • अहोई माता की पूजा और कथा सुनना।

  3. त्रयोदशी – धनतेरस (धन्वंतरि जयंती)

    • धन एवं स्वास्थ्य की देवता धन्वंतरि की पूजा।

    • सोना-चाँदी या बर्तन खरीदने की परंपरा।

  4. चतुर्दशी – रूप चतुर्दशी

    • सौंदर्य और स्वास्थ्य की कामना हेतु पूजा।

  5. अमावस्या – दीपावली

    • महत्व:

      • भगवान महावीर का निर्वाण दिवस

      • स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण दिवस।

    • घरों में दीपमाला, लक्ष्मी पूजन और पटाखे।

शुक्ल पक्ष

  1. प्रतिपदा (एकम) – गोवर्धन पूजा

    • अन्नकूट महोत्सव (नाथद्वारा में विशेष):

      • भगवान कृष्ण को 56 भोग लगाए जाते हैं।

      • भील जनजाति द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ।

  2. द्वितीया – भाई दूज (यम द्वितीया)

    • भाई-बहन के प्रेम का त्योहार।

    • बहनें भाई को टीका लगाकर मिठाई खिलाती हैं।

  3. अष्टमी – गोपाष्टमी

    • गायों की पूजा का दिन।

  4. नवमी – आँवला नवमी (अक्षय नवमी)

    • आँवले के वृक्ष की पूजा, स्वास्थ्य लाभ हेतु।

  5. एकादशी – देवउठनी एकादशी

    • अन्य नाम: प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी एकादशी।

    • पुष्कर मेला प्रारंभ (अजमेर)।

    • तुलसी विवाह की रस्म।

  6. पूर्णिमा – सत्यनारायण पूर्णिमा

    • सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ।

प्रमुख मेले

  1. पुष्कर मेला (अजमेर)

    • तीर्थराज (तीर्थों का राजा) एवं कोंकण तीर्थ

    • मुख्य स्थल:

      • ब्रह्मा मंदिर (विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर)।

      • सावित्री मंदिर, गायत्री मंदिर, रंगनाथ मंदिर।

      • 52 घाट और 500 मंदिर

    • तीयों का मामा (तीर्थयात्रियों के लिए विशेष महत्व)।

  2. कोलायत मेला (बीकानेर)

    • कपिल मुनि का आश्रम (सांख्य दर्शन के प्रवर्तक)।

    • कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का महत्व।

  3. चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन)

    • चन्द्रभागा नदी के तट पर आयोजित।

  4. रामेश्वरम मेला (सवाई माधोपुर)

    • चम्बल, बनास और सीप नदियों का संगम

  5. हाड़ौती का सुरंगा मेला

    • पशु मेला (मालवी नस्ल के पशुओं की बिक्री)।

रोचक तथ्य

  • तीरथों का भांजा: मचकुंड (धौलपुर)।

  • तीर्थों की रानी: देवयानी (सांभर, जयपुर)।

  • पुष्कर मेले में ऊँटों की दौड़ और कल्चरल प्रोग्राम आकर्षण का केंद्र होते हैं।

कार्तिक मास भक्ति, प्रकाश और समृद्धि का संगम है!

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