मेहाजी मांगलिया: राजस्थान के योद्धा संत

(जीवन परिचय एवं लोक महत्व)

मूल जानकारी

  • मंदिर स्थल: बापीणी (फलौदी, जोधपुर)

  • प्रमुख मेला: कृष्ण जन्माष्टमी

  • घोड़ा: किरड काबरा (विशेष नाम वाला घोड़ा)

ऐतिहासिक संदर्भ

  • समकालीन शासक:

    • मंडोर के राणा रुपड़ा प्रतिहार

    • मारवाड़ के राव चंडा

  • युद्ध:

    • हेतू नामक गुर्जर महिला की गायों की रक्षा करते हुए

    • रासकदेव भाटी के साथ संघर्ष में वीरगति प्राप्त की

धार्मिक विशेषताएँ

  1. लोकदेवता का दर्जा:

    • गौरक्षक एवं निर्बलों के रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं।

  2. अनूठी परंपरा:

    • इनके भोपों (पुजारियों) की वंश वृद्धि नहीं होती (एक रहस्यमय मान्यता)।

  3. पूजा सामग्री:

    • घोड़े (किरड काबरा) की प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।

सांस्कृतिक प्रभाव

  • मेहाजी की गाथाएँ:

    • लोकगीतों में हेतू गुर्जरिन और गायों की रक्षा की कथा प्रसिद्ध है।

  • बापीणी मंदिर:

    • फलौदी क्षेत्र में आस्था का केंद्र।

    • कृष्ण जन्माष्टमी पर विशाल मेले का आयोजन।

तुलनात्मक विश्लेषण: मेहाजी vs अन्य लोकदेवता

देवता प्रमुख योगदान विशेषता
मेहाजी मांगलिया गुर्जर महिला की गायों की रक्षा भोपों की वंश वृद्धि न होना
पाबूजी ऊँटों की रक्षा फड़ बाँचने की परंपरा
हड़बूजी राव जोधा को मंडोर जीतने में सहायता सियार वाहन

मेहाजी: मारवाड़ की वीरता और न्याय की अद्भुत मिसाल!

 “मेहा री बलिदानी, गाय राखी सीमांणी!”

(राजस्थानी कहावत: मेहाजी ने गायों की रक्षा के लिए सीमा पर बलिदान दिया)।

Exit mobile version