कृष्ण पक्ष
तृतीया – धींगा गवर
मेले:
जोधपुर एवं जोधपुर ग्रामीण
नक्की झील मेला (माउंट आबू)
गौतमेश्वर मेला (अरबौद, प्रतापगढ़)
गौतमीसागर मेला (सालरापाटल)
पशु मेला (मालवी नस्ल के पशु)
शुक्ल पक्ष
तृतीया – अक्षय तृतीया (आखा तीज)
बीकानेर की स्थापना दिवस (राव बीका द्वारा 1488 ई. में)
पतंगबाज़ी का आयोजन (बीकानेर में विशेष)
सर्वाधिक बाल विवाह (पारंपरिक रूप से शुभ मुहूर्त माना जाता है)
पूर्णिमा – बुद्ध पूर्णिमा
पीपल पूर्णिमा मेले
बाणगंगा मेला (विराटनगर, जयपुर)
मातृकुण्डिया मेला (चित्तौड़गढ़)
प्रमुख मेलों की विशेषताएँ
नक्की झील मेला (माउंट आबू)
राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन मेला
नौका विहार और सांस्कृतिक कार्यक्रम
गौतमेश्वर मेला (अरबौद, प्रतापगढ़)
गौतम ऋषि से जुड़ा धार्मिक मेला
आदिवासी संस्कृति का प्रदर्शन
बाणगंगा मेला (जयपुर)
महाभारत कालीन बाणगंगा तालाब के किनारे
स्नान और दान का विशेष महत्व
मातृकुण्डिया मेला (चित्तौड़गढ़)
मातृकुंड (शक्ति पीठ) के तट पर
श्रद्धालु पिंडदान करते हैं
कृषि एवं परंपरा
अक्षय तृतीया को नई फसल का उत्सव
मालवी पशु मेले में किसान उत्तम नस्ल के पशु खरीदते हैं
ऐतिहासिक तथ्य
बीकानेर की स्थापना अक्षय तृतीया को हुई, इसलिए यहाँ पतंगबाज़ी की परंपरा
धींगा गवर में ग्रामीण क्षेत्रों में लोकनृत्य व गीतों का आयोजन
वैशाख मास: कृषि, संस्कृति और इतिहास का संगम!